जेलों के भोजन की गुणवत्ता पर हाईकोर्ट सख्त, झालसा को औचक जांच करने का आदेश

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झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में कैदियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया है. रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में भोजन की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों से जुड़े मामले में गुरुवार को जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली बेंच में सुनवाई हुई. शिकायतें आकाश कुमार राय नामक शख्स की ओर से दायर क्रिमिनल अपील के दौरान अदालत के सामने लाई गई थीं. इस दौरान जेल अधीक्षक सुदर्शन मुर्मू और जेलर लवकुश कुमार गुरुवार को हाईकोर्ट में उपस्थित हुए. दोनों अधिकारियों ने कैदियों को दिए जा रहे भोजन की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की.

जेलर ने अदालत को बताया कि अब भोजन पूरी तरह से जेल मैनुअल के अनुसार उपलब्ध कराया जा रहा है और उसमें सुधार सुनिश्चित किया गया है. कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देश के अनुसार, गृह सचिव और आईजी जेल की ओर से सभी जिलों की जेलों में भोजन की गुणवत्ता पर तैयार रिपोर्ट के साथ एक शपथ पत्र दाखिल किया गया.

सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि भोजन की गुणवत्ता में पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है और अब सभी जेलों में मैनुअल के प्रावधानों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. कैदियों के हित में अदालत ने जेल परिसर में कैंटीन संचालित करने की अनुमति भी दी है. साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि भोजन आपूर्ति में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी सीधे जेलर की होगी.

हाईकोर्ट ने झारखंड लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (झालसा) और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) को राज्य के जिलों का औचक निरीक्षण कर दो सप्ताह के भीतर जेलों में भोजन पर अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल करने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को निर्धारित की गई है. कोर्ट ने झालसा के सदस्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी झालसा चेयरमैन को आदेश की प्रति भेजें और आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करें.

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