उत्तर भारत में बर्फबारी और पश्चिमी विक्षोक्ष के प्रभाव के चलते झारखंड में भयंकर ठंड का दौर जारी है. प्रदेश के कई जिले इन दिनों भीषण शीतलहरी की चपेट में हैं. बर्फीली हवाओं और घने कोहरे के कारण राजधानी रांची समेत कई जिलों में तापमान 3 डिग्री सेल्सियस के नीचे पहुंच गया है. ऐसे हालत में रात के वक्त में काफी ज्यादा कनकनी महसूस हो रही है. जिसकी वजह से अकेली रजाई से भी काम नहीं चल रहा है. दिन के वक्त भी लोगों को अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है. मौसम विभाग ने मकर संक्रांति तक मौसम में कोई बदलाव की संभावना नहीं जताई है. मौसम विभाग के मुताबिक, बुधवार (7 जनवरी) इस सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा. बुधवार को रांची, खूंटी, पलामू और गुमला में पारा 3 डिग्री सेल्सियस के नीचे पहुंच गया.
मौसम विभाग ने आज राजधानी रांची के अलावा लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, खूंटी और पश्चिम सिंहभूम जिले में कोल्ड-डे घोषित करते हुए येलो अलर्ट जारी किया है. इन जिलों में भयंकर कोहरा के साथ-साथ प्रचंड शीतलहरी चलने की संभावना जताई गई है. जबकि सराईकेला और पूर्वी सिंहभूम समेत गढ़वा, पलामू, लातेहार, चतरा, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद, जामताड़ा, देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जिले के लिए कोई चेतावनी नहीं जारी की गई है. कई दिनों बाद आज इन जिलों में सूरज की धूप देखने को मिल सकती है. हालांकि, शीतलहरी से लोगों को कपकपी महसूस होगी.
राजधानी रांची में ठंड का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है. सुबह से देर रात तक चल रही सर्द हवाओं और घने कोहरे ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. ऐसे हालात में ठंड से राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने एक संवेदनशील और सराहनीय पहल की है. शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अलाव की व्यवस्था की गई है, जिससे राहगीरों, दिहाड़ी मजदूरों और जरूरतमंद लोगों को ठंड से राहत मिल सके. कड़ाके की ठंड में सफर कर रहे लोग अलाव के पास कुछ देर रुककर गर्माहट का सहारा ले रहे हैं. इस पहल से राहत महसूस कर रहे लोगों ने रांची जिला प्रशासन और राज्य सरकार का धन्यवाद भी किया है.
वहीं खूंटी में भयंकर वाली सर्दी पड़ रही है. यहां पाला गिरने से घासों में बनकर सफेद चादर की तरह पसर गया है. वहीं न्यूनतम तापमान गिरकर 5 डिग्री पर आ गया है. साथ ही कनकनी हवा और भी ठिठुरन बढ़ा दी है. जिसके कारण लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है. सुबह धूप भी देर से दिखाई देती है और शाम होते ही लोग अलाव का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं.
