भोजपुर में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर को लेकर बिहार पुलिस सवालों के घेरे में है. विपक्ष के साथ-साथ बीजेपी के भी तमाम बड़े नेता इस एनकाउंटर को फर्जी बताकर जांच की मांग कर रहे हैं. अब इस मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. पुलिस ने इस मामले में मृतक भरत तिवारी के परिजनों और मुखिया बलिराम यादव समेत 14 नामजद और 50 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. आरोप है कि इन लोगों ने शव के साथ एनएच-22 पर जाम लगाया था और खूब हंगामा काटा था. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के बहाने क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की गई थी. शाहपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस की ओर से एफआईआर में भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है.
बता दें कि एनकाउंटर के बाद भरत तिवारी के परिजनों ने गांव वालों के साथ मिलकर मृतक के शव को सड़क पर रखकर आरा-बक्सर फोरलेन को जाम कर दिया था और शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की थी. नाराज लोग इस एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे. उधर, हाईवे पर यातायात खुलवाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज करके लोगों को सड़क से हटाया था. इसके बाद से ग्रामीण और उग्र हो गए थे. अब पुलिस की ओर से दर्ज तीन FIR में सड़क जाम, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हथियार प्रदर्शन जैसे आरोप लगाए गए हैं. बिलौटी पंचायत के मुखिया समेत कई लोगों को नामजद किया गया है.
इधर, बीजेपी के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भी इस एनकाउंटर को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है. उन्होंने कहा कि यदि युवक ने हथियार डाल दिया था, तो उसके बाद किया गया एनकाउंटर पूरी तरह गलत और अमानवीय है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में शामिल दोषी पुलिसकर्मियों को न सिर्फ सख्त सजा मिलनी चाहिए, बल्कि उन्हें मृत्युदंड तक दिया जाना चाहिए. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग भी की है.
