झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच मयूराक्षी उप-बेसिन के जल के बंटवारे को लेकर जल्द ही समझौता होगा। प्रस्तावित समझौते का मसौदा तैयार हो गया है। जल बंटवारे के लिए प्रस्तावित मसौदे पर झारखंड और बंगाल सरकार के बीच समझौता होगा, जिस पर केंद्र सरकार (केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय) की सहमति अनिवार्य होगी। प्रस्तावित मसौदे में जल का मात्रात्मक (वॉल्यूमेट्रिक) बंटवारा तय करने के साथ मसानजोर बांध और तेनुघाट बांध के संयुक्त नियंत्रण की संस्थागत व्यवस्था भी की गई है।
बेसिन की छह नदियों पर बनी प्रमुख जल संरचनाओं में कुल वार्षिक जल प्रवाह 1,280.18 मिलियन घन मीटर (एमसीएम) आंका गया है, जिसका बंटवारा होगा। दोनों पक्षों ने 1991 से 2022 तक के 32 वर्षों के ऐतिहासिक प्रवाह आंकड़ों पर आधारित 75 प्रतिशत निर्भर प्रवाह को मानक माना है। मसौदे पर हस्ताक्षर होने के बाद यह समझौता मसानजोर बांध के जल उपयोग और संयुक्त नियंत्रण से जुड़े सभी पूर्व प्रावधानों का स्थान ले लेगा। इनमें 12 मार्च 1949 का समझौता और 19 जुलाई 1978 का पूरक समझौता शामिल है। प्रस्तावित मसौदे को राज्य मंत्रिपरिषद से स्वीकृति मिल चुकी है। प्रस्ताव के अनुसार पश्चिम बंगाल को कुल 626.59 एमसीएम और झारखंड को 653.59 एमसीएम जल मिलेगा। बक्रेश्वर और कोपाई नदियों पर बने क्रमश: कांदीशाला वीयर और कुलटोर बैराज का पूरा प्रवाह पश्चिम बंगाल को दिया गया है, क्योंकि इनके जलग्रहण क्षेत्र का कोई भाग झारखंड में नहीं है।
समझौते की समीक्षा 20 वर्ष बाद की जा सकेगी
विवाद निपटारे के लिए पहले स्थायी समिति में सौहार्दपूर्ण समाधान का प्रयास होगा। सहमति न बनने पर मामला दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के पास जाएगा और उसके बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की मध्यस्थता में सुलझाया जाएगा। समझौते की समीक्षा हस्ताक्षर की तिथि से 20 वर्ष बाद की जा सकेगी।
ऐसे होगा छह बैराज व वीयर का जल बंटवारा
हाइड्रोलिक स्ट्रक्चर कुल क्षमता पश्चिम बंगाल झारखंड
मसानजोर बांध 597 290.80 306.20
तिलपाड़ा बैराज 279.00 139.00 140.00
बैधारा बैराज 250.00 50.00 200.00
कुलटोर बैराज 106.00 106.00 0.00
कांदीशाला वियर 33.40 33.40 0.00
देउचा बैराज 14.78 7.39 7.39
