क्या हैं आरोप
छापे के दौरान भारी मात्रा में वित्तीय दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। चौका थाना क्षेत्र के खूंचीडीह स्थित बंद कोहिनूर स्टील कंपनी परिसर में भी टीम ने करीब आठ घंटे तक जांच की और वीडियोग्राफी कराई। जांच के अनुसार, कंपनी ने खूंचीडीह गांव में 66 मेगावाट क्षमता का पावर प्लांट लगाने के नाम पर वर्ष 2008 से 2013 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से 290 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा ली थी। आरोप है कि इस राशि का उपयोग प्लांट निर्माण में करने के बजाय समूह की 100 से अधिक शेल कंपनियों के खातों में डायवर्ट कर दिया गया। प्रमोटर विजय बोथरा, प्रशांत बोथरा और उनके परिजनों पर फर्जी दस्तावेज और हेराफेरी के जरिए कोलकाता में अचल संपत्तियां खरीदने का आरोप है।
वर्ष 2018 में एनसीएलटी में दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने के बाद 2019 में लिक्विडेशन के दौरान बैंकों को महज सात करोड़ रुपये ही वापस मिले, जिससे उन्हें 97.5 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ।
दिखावटी ढांचा खड़ा कर हासिल की बैंक की राशि
कोहिनूर ग्रुप ने वर्ष 2005 में राज्य सरकार के साथ पावर प्लांट और स्टील उद्योग लगाने के लिए एमओयू किया था। जमीन लेकर महज दिखावटी ढांचा खड़ा किया गया और भारी कर्ज मंजूर करा लिया गया। वर्ष 2015 में बैंकों ने इस खाते को एनपीए घोषित कर दिया। 2016 तक भी निर्माण पूरा नहीं हुआ। फिलहाल कंपनी का कार्यालय और प्लांट वर्षों से बंद पड़े हैं।
