वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्तीय वर्ष 2026-27 का आम बजट एक फरवरी को पेश करेंगी. देश के आम बजट को लेकर एक तरफ जहां झारखंड के आम लोग आशान्वित हैं तो वहीं दूसरी और मामले पर सियासत देखने को मिल रही है. झारखंड के सत्ताधारी दल हमेशा की तरह इस बार भी केंद्र के द्वारा ठगे जाने का आरोप लगा रहे हैं तो वहीं विपक्ष की उम्मीदें बहुत हैं.
'इस बार हमें पूरी उम्मीद है'
निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले आम बजट से हर आम और खास लोगों को उम्मीदें हैं. झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि इस बार हमें पूरी उम्मीद है कि जो हमारा बकाया है, इस बजट में भारत सरकार प्रावधान करेगी. झारखंड जैसे पिछड़े राज्यों के लिए जो मनरेगा योजना में प्रावधान किए गए हैं, उसे दुरुस्त किया जाए.
भारतीय जनता पार्टी के विधायक नवीन जयसवाल ने कहा कि 2014 से 2026 तक का जो सफर है, वह अभूतपूर्व रहा है . उन्होंने कहा कि 10 साल पहले इनकम टैक्स का स्लैब 2-3 लाख रहता था और उसके ऊपर सभी को इनकम टैक्स देना होता था. इन 10 वर्षों में 10 लाख का सीमा पार हो गया है. आम आदमी चाहे गरीब, चाहे महिला नौजवान किसान या युवा हो हमेशा केंद्र बिंदु पर प्रधानमंत्री ने इन्हें रखा है और जो भी योजनाएं दिखती हैं, वह हर वर्ग के लिए है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश मजबूत हो रहा है और जो बजट पेश होने वाला है उनसे हमें उम्मीद है कि गरीब किसान युवा महिलाओं को फोकस कर बजट को लाया जाएगा और झारखंड सहित देशवासियों को सौगात दी जाएगी.
झारखंड मुक्ति मोर्चा को भी केंद्र द्वारा पेश किए जाने वाले बजट से थोड़ी उम्मीदें तो है लेकिन केंद्र सरकार पर कटाक्ष भी किया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता धीरज दुबे ने कहा कि इस फेडरल स्ट्रक्चर में इस नियत से भेदभाव किया जाता है कि हमारी बीजेपी और बीजेपी एलाइंस की सरकार नहीं है. आम बजट में झारखंड को हमेशा दरकिनार किया गया है. प्रधानमंत्री झारखंड की भौगोलिक और राजनीतिक स्थिति देखते हुए बजट का एक खास हिस्सा प्रदान करें ताकि झारखंड का विकास हो सके.
झारखंड कांग्रेस को केंद्रीय बजट से बिल्कुल भी उम्मीद नहीं है. प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने कहा कि हर बार केंद्रीय बजट में झारखंड खुद को ठगा महसूस करता है. हर बार हमारे साथ छलावा होता है .इस बार तो कम से कम झारखंड को भाग नहीं जाए, क्योंकि झारखंड वह राज्य है जहां से अब 12 सांसद हैं. देश भर में भाजपा को सांसदों की संख्या तो जरूर मिली लेकिन झारखंड की हमेशा उपेक्षा हुई. 136000 करोड़ जो हमारा बताया है, वह हमें जरूर मिले. हम भीख नहीं अपना हक मांग रहे हैं.
