झारखंड की सियासत में अपनी जमीन तलाश रही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को एक बड़ी कामयाबी मिली है. पाकुड़ के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक अकील अख्तर ने अपने बेटे के साथ पार्टी का दामन थाम लिया है. यह राजनीतिक घटनाक्रम हैदराबाद में हुआ, जहां अकील अख्तर ने ओवैसी की मौजूदगी में एआईएमआईएम की सदस्यता ग्रहण की. इस नए गठबंधन से संथाल परगना के राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है.
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर ने इस ज्वाइनिंग को झारखंड में पार्टी के लिए एक मील का पत्थर बताया है. उन्होंने कहा कि अकील अख्तर जैसे अनुभवी नेता के आने से न केवल पाकुड़ बल्कि पूरे संथाल परगना प्रमंडल में पार्टी की स्थिति मजबूत होगी. शाकिर के अनुसार, संथाल परगना में लगभग साढ़े छह लाख मुस्लिम मतदाता हैं. हाल के चुनावी नतीजों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों का आधार खिसक रहा है, ऐसे में अल्पसंख्यक समुदाय अब एआईएमआईएम की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है. पार्टी आने वाले निकाय चुनावों में अपने समर्थित उम्मीदवारों को पूरी ताकत के साथ मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है.
अकील अख्तर झारखंड की राजनीति का एक जाना-माना नाम रहे हैं. उनके राजनीतिक सफर की बात करें तो उन्होंने साल 2009 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के टिकट पर पाकुड़ विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा का सफर तय किया था. इसके बाद वे आजसू (AJSU) और समाजवादी पार्टी में भी रहे. एआईएमआईएम में शामिल होने के बाद अकील अख्तर ने कहा कि वे असदुद्दीन ओवैसी के आदर्शों और उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों से बेहद प्रभावित हैं. उनका मुख्य लक्ष्य अब झारखंड के कोने-कोने में पार्टी के संगठन को मजबूत करना और दबे-कुचले समाज की आवाज बुलंद करना है.
झारखंड में आगामी निकाय चुनावों को लेकर एआईएमआईएम अपनी रणनीति तैयार कर रही है. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अकील अख्तर के अनुभव का लाभ निकाय चुनाव में सीधे तौर पर मिलेगा. प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि पार्टी अब केवल वोट बैंक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सत्ता और व्यवस्था में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी. संथाल के मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी अपना परचम लहराने के लिए कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की मुहिम तेज कर दी है.
