झारखंड में होने वाले नगर निकाय चुनाव की घोषणा इसी सप्ताह संभव है. झारखंड में लंबे समय से नगर निकाय चुनाव लंबित है. राज्य निर्वाचन आयोग ने लगभग तैयारी पूरी कर ली है. चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी.बता दें कि राज्य में होने वाले निकाय चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है और सभी राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से रणनीति बनाने में जुट गई हैं.
इस चुनाव में खूब बयानबाजी भी देखने को मिल रही है. कुछ दिनों पहले बीजेपी सांसद प्रदीप वर्मा ने कहा था कि एक राजनीतिक दल होने के नाते जनता के हित का विषय उठाते रहेंगे, अगर सरकार अपनी हठधर्मिता पर अड़ी रहेगी और जनता के हित को किनारे कर के गैर दलीय चुनाव करवाने का तय कर लेगी, फिर बीजेपी सोचेगी कि क्या करना है.
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिंह ने कहा था कि निकाय चुनाव कांग्रेस के लिए अहम चुनाव है. राजीव गांधी ने देश में पंचायती राज की व्यवस्था लागू की थी. यह उनके सपनों की एक सोच थी. कांग्रेस पार्टी पूरी मुस्तैदी के साथ पंचायत चुनाव की तैयारी में लगी है. सीनियर नेताओं ने हर जिले में जाकर कई दौर की बैठकें की हैं. हमने तय किया है अगर निकाय चुनाव में पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता खुद या उनके परिजन आना चाहते हैं, तो पार्टी उस पर विचार करेगी. इस तरह से हमें लगता है निकाय चुनाव में पूरी तरह जीत हासिल कर सकते हैं.
वहीं झामुमो सांसद महुआ मांझी ने निकाय चुनाव को लेकर कहा था कि हमारी पार्टी के एक्टिव कार्यकर्ता और सदस्य जो हर क्षेत्र में काम कर रहे हैं. वो चुनावी मैदान में दिखेंगे. महुआ मांझी ने दावा किया कि इस बार झामुमो सबसे ज्यादा वोट लाकर अपना मेयर, डिप्टी मेयर बनाएगी. सभी पार्षद जेएमएम के जीतेंगे. उन्होंने कहा कि जनता के बीच जो बहुत ज्यादा काम करते हैं, जनता में उनकी स्वीकार्यता होनी चाहिए. वो किसी दल के स्पोर्टर हो सकते हैं, पर आपको जनता कितना चाहती है. आपने जनता के लिए क्या क्या किया है, निकाय चुनाव में ये मुद्दा ज्यादा अहम होता है.
