नवादा जिले के सदर अस्पताल के मुख्य सड़क पर एक नवजात शिशु का शव मृत अवस्था में मिला है. शिशु को कपड़े में लपेटकर फेंका गया था. स्थानीय लोगों ने बताया कि कुत्तों ने कपड़े को नोंचकर हटाया, जिसके बाद नवजात का शव दिखाई दिया. इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई. स्थानीय निवासियों ने तुरंत इसकी सूचना अधिकारियों को दी, लेकिन लगभग एक घंटे तक कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा. बाद में सदर अस्पताल के प्रबंधक कुमार आदित्य को जानकारी मिली. उन्होंने तत्काल सफाई कर्मियों को बुलाकर शिशु के शव को वहां से हटवाया.
अवैध गर्भपात की आशंका
अस्पताल प्रबंधक कुमार आदित्य ने आशंका जताई कि अस्पताल के आसपास कई निजी अस्पताल और क्लीनिक संचालित हैं. संभवतः उनमें से किसी ने अवैध गर्भपात या असुरक्षित प्रसव के बाद बच्चे को यहां फेंका होगा. बिहार में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं. कन्या शिशु के प्रति पूर्वाग्रह, गरीबी, जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं की अपर्याप्तता जैसे कारण इन क्रूर कृत्यों को बढ़ावा देते हैं.
समाज में कुरीतियों को उजागर करती है घटना
यह घटना समाज में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों को उजागर करती है. जहां एक ओर सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियान चला रही है, वहीं ऐसी घटनाएं इन प्रयासों की विफलता दर्शाती हैं. नवादा जैसे जिलों में अनाथालयों और 'क्रैडल बेबी स्कीम' जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि अनचाहे बच्चों को सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जा सके. ऐसे में निजी अस्पतालों पर सख्त निगरानी, लिंग जांच पर पूर्ण प्रतिबंध और अवैध प्रसव या गर्भपात पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए.
