पटना में नीट छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की गुत्थी सुलझने का नाम नहीं ले रही है. पटना के शंभू हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा के साथ आखिर क्या हुआ था? इस सवाल का जवाब ना तो पटना पुलिस के पास है और ना ही SIT टीम खोज पाई. परिजनों के मुताबिक, पुलिस इसे आत्महत्या साबित करने में जुटी है, जबकि छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन शोषण की बात सामने आई है और लड़की के अंडरगार्मेंट्स में ह्यूमन स्पर्म भी मिले हैं. परिजनों का आरोप है कि बिहार पुलिस की ओर से दबाव बनाया जा रहा है कि उनकी बच्ची ने आत्महत्या की है. परिजनों के अनुसार, प्रदेश के एक बड़े नेता के नाम से उनको धमकाया जा रहा है. पीड़ित परिवार के इन आरोपों के बाद अब सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की है.
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने अपने सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर दी है. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- 'बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भारत सरकार से पटना में हुए NEET छात्रा की हत्या के मामले (कांड संख्या- 14/26) को CBI से जांच का आग्रह किया है. घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन निश्चित किया जाए.' अब सवाल यह है कि जब पटना पुलिस ने इतना रायता फैला दिया है, तो सीबीआई इसे कैसे समेटगी? परिवार और कुछ नेता आरोप लगा रहे हैं कि पटना पुलिस किसी सफेदपोश या प्रभावशाली व्यक्ति को बचा रही है.
इस केस के अनसुलझे सवाल
1- पुलिस की ओर से छात्रा की यौन शोषण की बात दबाई क्यों गई? पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ.
2- नीट छात्रा का रेप हॉस्टल में हुआ या बाहर?
3- उसके अंडरगारमेंट्स पर मिले मेल स्पर्म किसका है?
4- पुलिस लगातार मामले को आत्महत्या का रूप क्यों देना चाहती है?
5- क्या इसके पीछे कोई ताकतवर चेहरा है, जिसे पुलिस सामने नहीं लाना चाहती?
जांच के नाम पर परिजनों का टॉर्चर किया जा रहा
इस केस में कई एजेंसियां एक साथ काम कर रही हैं, लेकिन तालमेल की भारी कमी है. परिजनों का आरोप है कि पुलिस उन्हें और उनके रिश्तेदारों को परेशान कर रही है. उनका आरोप है कि कभी चित्रगुप्त थाना की पुलिस पहुंच जाती है, कभी एसआईटी आकर सवाल पूछती है, तो कभी सीआईडी के अफसर नए सिरे से पूछताछ शुरू कर देते हैं. छात्रा के पिता का कहना है पुलिस पहले ही तय कर चुकी है कि यह मर्डर नहीं है. उन्होंने साफ कहा है कि उन्हें बिहार पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं रहा.
पुलिस की लापरवाही की एक झलक
हॉस्टल का जो कमरा एक तरह से पूरा क्राइम सीन था, जिस कमरे में पीड़िता बेहोश मिली थी. उस कमरे को सील करना तो छोड़िए उसकी जांच करने या वहां से कोई सबूत हासिल करने के लिए भी अगले तीन दिनों तक पुलिस पहुंची ही नहीं. पूरे तीन दिनों तक ना हॉस्टल सील हुआ, ना कमरा, ना बिस्तर, ना पीड़िता के कपड़े. पीड़िता का तीन अस्पतालों में इलाज हुआ, लेकिन पुलिस का कोई बड़ा अधिकारी उसे देखने तक नहीं गया. यहां तक की पीड़िता के जिन अंडर गार्मेंट्स से स्पर्म मिले हैं, वो कपड़े भी खुद पुलिस ने बरामद नहीं किए बल्कि वो कपड़े पीड़िता के मां बाप ने पुलिस को सौंपे. इतनी बड़ी लापरवाही का ठीकरा चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी और कदमकुआं थाने के दरोगा हेमंत झा के सिर पर फोड़ दिया गया और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया.
