पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के बाद गठित विशेष जांच दल (SIT) ने जांच को और आगे बढ़ाते हुए जहानाबाद पहुंचकर कार्रवाई तेज कर दी है. SIT टीम ने छात्रा के परिजनों और उसके करीबी लोगों से घंटों गहन पूछताछ की. इस दौरान टीम को कई अहम इनपुट मिले हैं, जिनके आधार पर जांच की दिशा और दायरा और व्यापक कर दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े हर पहलू को बारीकी से खंगाला जा रहा है और किसी भी तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. इधर, सोमवार को प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉक्टर सतीश सिंह ASP अभिनव के कार्यालय पहुंचे. उन्होंने SIT जांच में हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया. टीम द्वारा मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेज डॉक्टर सतीश सिंह ने जांच अधिकारियों को सौंप दिए हैं. SIT इन दस्तावेजों की भी गहन जांच कर रही है.
छात्रा का मोबाइल फोन खोलेगा सारे राज?
SIT जांच में पता चला कि छात्रा के फोन से वाट्सऐप पर कुछ चैट को डिलीट किया गया था. हालांकि, एसआईटी ने डेटा एनालिसिस करते हुए उन वाट्सऐप चैट को वापस पा लिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन चैट्स में कई संदिग्ध नंबर सामने आए हैं, जिनकी गहराई से जांच की जा रही है. पुलिस को संदेह है कि घटना से पहले छात्रा कुछ विशेष लोगों के संपर्क में थी. रिकवर किए गए मैसेज से यह स्पष्ट हो सकता है कि उसे किन परिस्थितियों में निशाना बनाया गया. इसके साथ ही छात्रा के कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को एक डायरी मिली है. इसमें छात्रा ने अपनी भावनाओं और जीवन की कुछ निजी घटनाओं का जिक्र किया है. इसके अलावा हॉस्टल संचालक मनीष रंजन उर्फ मनीष चंद्रवंशी के करीबियों, वार्डेन और अन्य कर्मचारियों के मोबाइल रिकॉर्ड खंगाल रही है.
पटना पुलिस की लापरवाही से सबूत नष्ट हुए
बता दें कि छात्रा 5 जनवरी को जहानाबाद से पटना के शंभू हॉस्टल लौटी थी और अगले ही दिन यानी 6 जनवरी को अपने कमरे में बेहोश पाई गई थी. छात्रा को सबसे पहले सहज सर्जरी क्लीनिक, फिर प्रभात मेमोरियल अस्पताल और फिर पटना के मेदांता अस्पताल ले जाया गया. 11 जनवरी को छात्रा ने दम तोड़ दिया. 6 से 9 जनवरी तक अस्पताल बदलने का सिलसिला चलता रहा, लेकिन इस दौरान पुलिस पूरे सीन में कहीं नहीं दिखी. छात्रा तीन अस्पतालों में जिंदगी से जंग लड़ती रही. इस दौरान पुलिस की ओर से ना तो हॉस्टल सील किया गया और ना वह कमरा, जहां लड़की बेहोश पाई गई थी. इन जगहों से पुलिस को अहम सबूत मिल सकते थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
