बिहार में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर राजद लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलावर है. इसी कड़ी में राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि पूरे बिहार में राक्षसराज कायम है. मुख्यमंत्री अपराधियों के साथ खुलेआम घूमते हैं, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं. सुधाकर सिंह ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला जिस व्यापक स्तर पर हुआ था, उसके खिलाफ कार्रवाई में लीपापोती हुई. इसके चलते छोटी बच्चियों के साथ दुराचार करने वाले माफिया और गिरोह चलाने वाले लोगों के हौसले बुलंद हैं. उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर कांड में संचालक के घर मुख्यमंत्री बर्थडे पार्टी बनाने जाते थे. जिस राज्य का मुखिया अपराधियों के साथ खुलेआम आता-जाता हो, उनके साथ बैठता हो, तो स्पष्ट है कि बिहार का क्या हाल होगा.
पटना में नीट छात्रा की मौत की घटना पर सुधाकर सिंह ने कहा कि यह सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं है. यह सामूहिक चिंता का विषय होना चाहिए. बिहार में अपराधियों और माफियाओं के मनोबल को तोड़ने के लिए सरकार को व्यवस्था बनानी होगी. राजद सांसद ने कहा कि बिहार में कोई महिला हॉस्टल नहीं बनाया गया, जबकि भारत सरकार की योजना के जरिए तमिलनाडु से लेकर महाराष्ट्र और गुजरात तक, अनेकों राज्य सैकड़ों हॉस्टल बना चुके हैं. इससे बच्चियों को संस्थागत रूप से सुरक्षा मिलती है. उन्होंने पूछा कि आखिर बिहार सरकार राज्य के भीतर क्या कर रही है.
इससे पहले, राजद सांसद ने मुंबई में 314 करोड़ रुपए की लागत से बिहार भवन निर्माण के फैसले पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि जब बिहार में कैंसर से लोग मर रहे हैं, तब सरकार भवन बनाने में करोड़ों रुपए क्यों खर्च कर रही है? उन्होंने कहा कि बिहार की सबसे बड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था त्रासदी यह है कि आज भी राज्य में कैंसर के इलाज के लिए कोई समर्पित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल उपलब्ध नहीं है. यही कारण है कि बिहार के हजारों कैंसर मरीज इलाज के लिए मजबूरन मुंबई, दिल्ली या चेन्नई जाते हैं. यह उनकी पसंद नहीं, बल्कि मजबूरी है. जब अपने ही राज्य में इलाज की व्यवस्था नहीं होगी, तो आम आदमी आखिर जाएं भी तो कहां जाएं?
सुधाकर सिंह ने कहा कि 314 करोड़ रुपए की राशि कोई मामूली रकम नहीं है. इसी राशि से बिहार में एक आधुनिक कैंसर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की नींव रखी जा सकती है. ऐसा अस्पताल जहां बिहार के मरीजों को इलाज के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर न जाना पड़े, न ट्रेन में धक्के खाने पड़ें, न ही इलाज के अभाव में जान गंवानी पड़े. राजद सांसद ने कहा कि सरकार का तर्क है कि मुंबई का बिहार भवन इलाज के लिए आने वाले मरीजों की सुविधा के लिए बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि यह सुविधा आम मरीजों के लिए नहीं, बल्कि अधिकारियों, नेताओं और विशेष वर्ग के लिए होगी. एक गरीब कैंसर मरीज पहले ही दवा, जांच और ऑपरेशन के खर्च से टूट चुका होता है. उसके लिए मुंबई में इलाज कराना असंभव होता है. ऐसे में भवन बनाकर सरकार किस मरीज की मदद कर रही है?
.jpg)