पटना नीट छात्रा मौत मामला: पुलिस समन के बाद भी नहीं पहुंचे परिजन, DNA टेस्ट और पूछताछ पर संशय; अब दूसरे नोटिस की तैयारी

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पटना के शंभू हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत मामले में 35 दिन बाद भी पुलिस सुराग ही तलाश रही है. पुलिस ने एक बार फिर से परिजनों को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन परिजन पुलिस के सामने पेश नहीं हुए. जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने 9 फरवरी की रात को मृतका के चाचा और चचेरे दादा समेत परिवार के कुल 6 लोगों को समन जारी करके पूछताछ के लिए बुलाया था. मृतका के साथ परिवार के लोगों का DNA टेस्ट कराए जाने की संभावना भी जताई गई थी. हालांकि, परिवार वाले जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं हुए. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, परिजन अब दूसरी नोटिस का इंतजार कर रहे हैं. परिजनों का आरोप है कि जांच की दिशा भटकाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है, जबकि पुलिस का कहना है कि घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य है.

समन की अनदेखी: क्या है पूरा विवाद?

बता दें कि नीट छात्रा की मौत मामले में बिहार सरकार ने भले ही सीबीआई से जांच कराने की अनुशंसा कर दी हो, लेकिन एसआईटी की जांच अभी भी जारी है. इसी कड़ी में पुलिस ने 9 फरवरी की रात छात्रा के चाचा और चचेरे दादा समेत कुल 6 लोगों को नोटिस जारी किया था. जानकारी के अनुसार, पुलिस अब तक गिरफ्तार कर जेल भेजे गए हॉस्टल की बिल्डिंग के मालिक सहित 20 से अधिक संदिग्धों का ब्लड सैंपल लिया जा चुका है, जिसका डीएनए टेस्ट किया गया है.

पुलिस का पक्ष: जांच में कुछ ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिन पर परिजनों का बयान और डीएनए सैंपल लेना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है.

परिजनों का तर्क: परिवार का कहना है कि वे दूसरी नोटिस का इंतजार कर रहे हैं. उनका आरोप है कि पुलिस मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए परिवार के लोगों को ही निशाना बना रही है.

जांच के घेरे में 'शम्भू गर्ल्स हॉस्टल

छात्रा की मौत पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई थी, जिससे हॉस्टलों की सुरक्षा और प्रबंधन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. बीती 6 जनवरी को गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा बेहोश मिली थी. जिसके बाद तीन अस्पतालों में उसका इलाज चला. इसके बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. 09 जनवरी को इस मामले में चित्रगुप्त नगर थाने में केस किया गया था, जबकि 11 जनवरी को इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गई थी.

डीएनए (DNA) टेस्ट क्यों है जरूरी?

पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या यह आत्महत्या है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश या लापरवाही छिपी है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल से मिले कुछ साक्ष्यों का मिलान करने और किसी भी बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता को खारिज करने के लिए डीएनए टेस्ट एक मानक प्रक्रिया है. हालांकि, परिजनों का सहयोग नहीं मिलने से जांच की गति धीमी पड़ रही है.

अब आगे क्या हो सकता है? 

इस मामले की जांच में सबकी नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं. 

दूसरा नोटिस: माना जा रहा है कि पुलिस जल्द ही दूसरा समन जारी कर सकती है.

कानूनी कार्रवाई: यदि परिजन बार-बार बुलाने पर भी नहीं आते हैं, तो पुलिस कोर्ट के माध्यम से वारंट या अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकती है.

इस केस से जुड़े अहम सवाल और उनके जवाब

प्रश्न: छात्रा कहां की रहने वाली थी?

उत्तर: छात्रा मूल रूप से जहानाबाद जिले की रहने वाली थी और पटना में रहकर पढ़ाई कर रही थी.

प्रश्न: पुलिस ने कितने लोगों को नोटिस दिया है?

उत्तर: 9 फरवरी की रात को पुलिस ने पीड़िता के चाचा और चचेरे दादा समेत परिवार के 6 सदस्यों को नोटिस दिया गया है.

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