रांची: झारखंड विधानसभा का बजट सत्र बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया. सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विपक्ष के हमलों का न केवल करारा जवाब दिया, बल्कि सरकार के 6 वर्षों के कार्यकाल का लेखा-जोखा भी पेश करते हुए इसे ऐतिहासिक और सार्थक करार दिया. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि झारखंड अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बना चुका है.
आर्थिक प्रबंधन: 86 हजार करोड़ से 1.58 लाख करोड़ तक का सफरमुख्यमंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि 2019 में जब उन्होंने सत्ता संभाली थी, तब राज्य का बजट महज 86 हजार करोड़ रुपये था. आज बेहतर वित्तीय प्रबंधन के कारण यह बढ़कर 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपये हो गया है. उन्होंने कहा, 6 वर्षों में बजट में 85 प्रतिशत की वृद्धि केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि सरकार की कार्यकुशलता का प्रमाण है.
अंतरराष्ट्रीय फलक पर झारखंड: दावोस से लंदन तक की धमक
सीएम ने गर्व के साथ साझा किया कि पहली बार झारखंड का कोई प्रतिनिधिमंडल दावोस (विश्व आर्थिक मंच) और लंदन गया. उन्होंने कहा कि यूनाइटेड किंगडम के साथ मिलकर झारखंड के युवाओं के लिए 'नॉलेज कॉरिडोर' बनाया जाएगा. साथ ही, 'मरांग गोमके स्कॉलरशिप' के तहत अब 35 की जगह 50 वंचित बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजने का प्रावधान किया गया है.
सामाजिक सुरक्षा और 'मइयां सम्मान' योजना
पेंशन योजनाओं पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले केवल 12-13 लाख लोगों को समय पर पेंशन नहीं मिलती थी, लेकिन आज सर्वजन पेंशन के माध्यम से 36 लाख लोगों को लाभ मिल रहा है. उन्होंने 'झारखंड मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना' को एक मिसाल बताया, जिससे 50 लाख महिलाएं जुड़ी हैं और अब तक 20 हजार करोड़ रुपये सीधे उनके खातों में भेजे जा चुके हैं.
प्रवासी श्रमिकों के लिए 'सुलभ योजना' और अंतरराष्ट्रीय केंद्र
मुख्यमंत्री ने खाड़ी देशों (Gulf Countries) की अनिश्चित स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वहां फंसे झारखंड के श्रमिकों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से 'प्रवासी श्रमिक केंद्र' खोले जाएंगे. उन्होंने घोषणा की कि यदि बाहर किसी श्रमिक की असामयिक मृत्यु या आत्महत्या जैसी दुखद घटना होती है, तो सरकार उनके पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक वापस लाने का खर्च उठाएगी.
केंद्र सरकार और विपक्ष पर तीखा हमला
सीएम सोरेन ने केंद्र की नीतियों और विपक्ष की भूमिका पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा, केंद्र पर मनरेगा का 1000 करोड़ रुपया बकाया है और नए नियमों से मजदूरों को पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है.
सांप्रदायिकता: उन्होंने कहा कि विपक्ष ने हर त्योहार को सेंसिटिव बना दिया है. छोटी चीजों को बड़ा कर आपसी रोष पैदा किया जा रहा है.
आदिवासी आवाज: असम के आदिवासियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अगर झारखंड की विधानसभा में आदिवासियों की आवाज नहीं उठेगी, तो कहां उठेगी?
डिजिटल विजन: सीएम डेटा इंटेलिजेंस
भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी कार्यों की निगरानी और तेजी के लिए 'सीएम डेटा इंटेलिजेंस' सिस्टम बनाया जा रहा है. इसके अलावा, 2028 तक राज्य में 5 इको-टूरिज्म सिस्टम विकसित किए जाएंगे और झारखंड इकोनॉमिक डेवलपमेंट काउंसिल का गठन होगा.
सत्र का सारांश: अनुशासन और लोकतंत्र की जीत
मुख्यमंत्री ने बताया कि 18 फरवरी से शुरू हुआ यह बजट सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक रहा. 17 कार्य दिवसों के दौरान.
858 तारांकित प्रश्नों में से 57 के उत्तर सदन में दिए गए.
72 ध्यानाकर्षण सूचनाओं में से 55 पर चर्चा हुई.
सदन कुल पौने 74 घंटे चला, जो लोकतांत्रिक परंपराओं का उत्कृष्ट उदाहरण है.
