झारखंड में बढ़ती गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए निजी स्कूलों ने छात्रों की सुरक्षा के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। स्कूल परिसर में जहां भी जगह उपलब्ध है, वहां अस्थायी इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि बच्चों को धूप से बचाया जा सके। सुबह 9:30 बजे के बाद छात्रों की बाहरी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों को कक्षाओं के बीच दौड़ने से रोकें और यदि किसी छात्र को असहज महसूस हो तो तुरंत सहायता प्रदान करें।
यह व्यवस्था फिलहाल अस्थायी रूप से लागू की गई है और मौसम में सुधार होने तक जारी रहेगी। अनएडेड स्कूल्स एसोसिएशन लगातार मौसम पर नजर बनाए हुए है और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर स्थिति का आकलन कर रहा है। यदि तापमान और बढ़ता है, तो स्कूल समय को और कम किया जा सकता है, परीक्षाएं स्थगित की जा सकती हैं या ज्यादा शारीरिक गतिविधियों को अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है।
अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे बच्चों का विशेष ध्यान रखें। उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं, धूप से बचाएं और स्कूल के बाद बच्चों को आराम करने दें। ठंडे पानी से स्नान, छायादार स्थान में आराम और बाहर भारी काम से बचाव जैसे छोटे उपाय भी लू के खतरे को कम कर सकते हैं।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने भी पहले ही कदम उठाते हुए 1 अप्रैल से सरकारी स्कूलों का समय सुबह 7:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक कर दिया है, जो पहले 9:00 बजे से 3:00 बजे तक था।
देशभर में बढ़ती गर्मी को देखते हुए इसी तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। कई राज्यों में स्कूल समय में बदलाव, समय से पहले गर्मी की छुट्टियां या “रेड अलर्ट” के दौरान स्कूल बंद करने जैसे फैसले लिए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर “वॉटर बेल” जैसी व्यवस्था भी शुरू की गई है, जिससे बच्चों को समय-समय पर पानी पीने की याद दिलाई जाती है।
झारखंड के अभिभावकों के लिए सलाह साफ है—बच्चों को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ दें, हल्के कपड़े पहनाएं और स्कूल के नए समय का पालन करें। समय रहते सावधानी और सही देखभाल से बढ़ती गर्मी के असर को कम किया जा सकता है, जब तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है।
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