मुजफ्फरपुर में ठगों ने CBI अधिकारी बनकर एक रिटायर बैंक अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट कर लिया और 10 दिनों तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा. आरोपियों ने पीड़ित से 67 लाख रुपए की ठगने के बाद छोड़ दिया. जब मामला साइबर थाने में पहुंचा तो साइबर डीएसपी ने मामले का खुलासा करते हुए पटना एक एनजीओ संचालक और उसके बेटे को पटना में छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया. पुलिस को आरोपियों के पास से कई बैंक अकाउंट और चेकबुक बरामद हुए हैं.
दरअसल, मुजफ्फरपुर के काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के आमगोला निवासी और पंजाब नेशनल बैंक से सेवानिवृत्त महेश गामी को साइबर अपराधियों ने सीबीआई अधिकारी बनकर वीडियो कॉलिंग के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट करते हुए अपना शिकार बनाया. पीड़ित के अनुसार 26 मार्च 2026 को उनके व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को CBI अधिकारी बताया और आरोप लगाया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है. उसके बाद साइबर अपराधियों ने 5 करोड़ के केस में फंसाने की धमकी दी. अपराधियों ने पीड़ित महेश गामी को बताया कि उनके नाम पर 5 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है और उस मामले में आरोपी बनाया गया है.
इस कार्रवाई से बचाने के नाम पर उन पर मानसिक दबाव बनाया गया. उन्हे 10 दिनों तक वीडियो कॉलिंग के जरिए डिजिटल अरेस्ट में रखा गया. साइबर अपराधियों ने 26 मार्च से 7 अप्रैल तक लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए उन्हें निगरानी में रखा. इस दौरान उन्हें घर से बाहर न निकलने और किसी को जानकारी न देने की सख्त हिदायत दी गई. साइबर अपराधी अलग-अलग नंबरों से खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर कॉल करता रहा, जिससे पंजाब नेशनल बैंक से रिटायर अधिकारी पूरी तरह डर गया. आरोपी उसे फर्जी दस्तावेज भेजकर गुमराह करते रहे और अपराधियों ने सुप्रीम कोर्ट, RBI, CBI और ED के नाम से फर्जी दस्तावेज भेजे, जिसमें गंभीर धाराओं में फंसाने की बात कही गई थी.
इससे पीड़ित पूरी तरह भयभीत हो गया और साइबर अपराधियों के जाल में फंसकर उसने साइबर अपराधियों के द्वारा दिए गए बैंक अकाउंट में दो किस्तों में 67 लाख की रुपए ट्रांसफर कर दिए. पीड़ित रिटायर बैंक अधिकारी महेश गामी ने 4 अप्रैल को 42 लाख और 6 अप्रैल को 25 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए. ठगी का एहसास होने पर उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर साइबर थाने की पुलिस ने कांड संख्या 51/26 दर्ज किया और तकनीकी जांच शुरू की. पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि साइबर अपराधी इस पूरे नेटवर्क का संचालन पटना से कर रहे हैं.
इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्र के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई. उसके बाद गठित विशेष टीम के साइबर सेल के अधिकारी ने तकनीकी जांच और बैंक खातों के विश्लेषण के बाद पटना से प्रियरंजन शर्मा और और अनंत अभिषेक को गिरफ्तार किया. जांच में सामने आया कि दोनों एनजीओ के नाम पर बैंक खाते खोलकर देशभर में बड़े-बड़े लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे. इन लोगों के खिलाफ 100 से अधिक शिकायतें सामने आई है, जिसका पूरे देश भर में एक बड़ा नेटवर्क चलता है. गिरफ्तार साइबर अपराधियों के ठिकाने से छापेमारी के दौरान बरामद बैंक खातों पर देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक शिकायतें दर्ज पाई गई हैं.
इनके खिलाफ चेन्नई और मुंबई में भी पूर्व से मामले दर्ज हैं. साइबर पुलिस के छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 23,900 रुपये नकद,एक लैपटॉप,19 पासबुक-चेकबुक,तीन मोबाइल,चार मोहर, एक पेनड्राइव,तीन स्कैनर और अन्य बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए हैं. पूरे मामले को लेकर साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने बताया मुजफ्फरपुर साइबर थाना पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 67 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का खुलसा करते हुए बड़ी कार्रवाई की है.
इस मामले में पटना के राजीव नगर थाना क्षेत्र से प्रियरंजन शर्मा और उसके बेटे अनंत अभिषेक को गिरफ्तार किया गया है. दोनों के पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल, लैपटॉप, बैंक दस्तावेज सहित कई सामान बरामद किए गए हैं. उन्होने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और कहा है कि डिजिटल अरेस्ट” या किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाले कॉल से सतर्क रहें.बिना पुष्टि किए किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें.यह मामला साइबर अपराधियों के नए और खतरनाक तरीकों को उजागर करता है,जहां डर और दबाव बनाकर लोगों से मोटी रकम वसूली जा रही है.
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