IAS संजीव हंस ने SVU के ADG को लिखा पत्र, कहा- गलत तरीके से उन्हें अभियुक्त बनाया गया

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रिशु श्री टेंडर घोटाला मामले में फंसे IAS संजीव हंस ने खुद को निर्दोष बताया है. उन्होंने अपनी सफाई देते हुए SVU के ADG पंकज दरार को एक लेटर लिखा है, जिसमें उन्होंने (आईएएस संजीव हंस) लिखा कि उन्हें इस केस में -गलत तरीके से अभियुक्त बनाया गया है. अपने 4 पन्ने के पत्र में आईएएस संजीव हंस ने दावा किया कि पर्याप्त साक्ष्य और प्रारंभिक जांच के बिना, उन्हें गलत तरीके से अभियुक्त बनाया गया है. उन्होंने लिखा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से वर्ष 2024 में दर्ज ECIR का आधार बनी, रूपसपुर थाना कांड संख्या 18/2023 को पटना हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था. बाद में इस मामले से संबंधित अपील को सर्वोच्च न्यायालय ने भी खारिज कर दिया था. इसके बावजूद ED ने SVU को सूचना भेजी और उन्हीं तथ्यों के आधार पर नई FIR दर्ज करके उन्हें आरोपी बनाया गया है.

आईएएस संजीव हंस ने अपने पत्र में कहा कि ED की ओर से भेजी गई सूचना में कहीं भी यह नहीं बताया गया कि टेंडर प्रक्रिया में कोई अनियमितता, भ्रष्टाचार या गलत कार्य हुआ था. टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया. इसके बावजूद उन्हें प्राथमिकी में नामजद कर दिया गया. 

आईएएस संजीव हंस ने अपने बचाव में बिहार लोक निर्माण विभाग संहिता का हवाला देते हुए कहा कि 350 लाख रुपये से अधिक की निविदाओं पर फैसला विभागीय निविदा समिति करती है. सचिव केवल समिति के अध्यक्ष होते हैं. उन्होंने कहा कि टेंडर से संबंधित सारे निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं. संबंधित परियोजनाओं के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया तकनीकी मूल्यांकन और विश्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुरूप टेंडर दिए गए थे.

उन्होंने कहा कि बीरपुर स्थित फिजिकल मॉडलिंग सेंटर परियोजना विश्व बैंक पोषित योजना का हिस्सा थी और इसका टेंडर निर्धारित प्रक्रिया, तकनीकी मूल्यांकन तथा विश्व बैंक की मंजूरी के बाद दिया गया था. टेंडर आवंटन से पहले तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद ही निविदाओं को अंतिम स्वीकृति दी जाती है. ऐसे में किसी एक अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है.

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