नीट (NEET UG Re-Exam) परीक्षा के दौरान लखीसराय में सॉल्वर गैंग पकड़े जाने के मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है. इस गिरोह से जुड़े मेडिकल छात्रों और बायोमीट्रिक कर्मियों की मिलीभगत सामने आई है. लखीसराय पुलिस ने इस मामले में अब तक 12 मेडिकल छात्र, एक मूल परीक्षार्थी और 17 बायोमीट्रिक कर्मी समेत कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को इसकी जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड BMIMS (भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) पावापुरी, नालंदा का MBBS फोर्थ ईयर का छात्र रविशंकर उर्फ सम्राट बताया जा रहा, जो फरार है.
इस फर्जीवाड़े में PMCH का एक छात्र भी अहम किरदार है. पकड़े जाने पर उसने पुलिस को अपना नाम मयंक कश्यप बताया था. हालांकि, जांच में पता चला कि उसका असली नाम अश्विनी कुमार है और हाजीपुर का रहने वाला है. बताया जा रहा है कि वह बायोमेट्रिक कर्मी बनकर परीक्षा केंद्र में घुसा था और अंदर बैठ परीक्षार्थियों की मदद कर रहा था. इस कांड में झारखंड के गिरिडीह की रहने वाली पूनम कुमारी का भी अहम रोल है. उसने 2021 में झारखंड बोर्ड की 12वीं परीक्षा में टॉप किया था. अब वह पेपर लीक गिरोह की सदस्य बन चुकी है.
जानकारी के मुताबिक, जालसाजों ने 40 लाख रुपए में डॉक्टर बनाने का ठेका लिया था. जांच में यह भी पता चला कि 6 राज्यों से मेडिकल छात्रों को हायर किया गया था, जो फर्जी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा देने का काम कर रहे थे. फर्जी अभ्यर्थी को परीक्षा हाल में प्रवेश दिलाने के लिए आरोपी रविशंकर उर्फ सम्राट ने बायोमीट्रिक टेंडर प्राप्तकर्ता प्रमोद कुमार यादव से सांठगांठ कर पहले बायोमीट्रिक व्यवस्था को अपने प्रभाव में लिया था.
इतना ही नहीं पटना मेडिकल कॉलेज के फोर्थ ईयर के स्टूडेंट मयंक कश्यप को बायोमीट्रिक कर्मी अंकित कुमार की जगह पर ड्यूटी में लगाया गया. इसी नेटवर्क के माध्यम से फर्जी परीक्षार्थियों को बिना प्रभावी सत्यापन के परीक्षा केंद्रों के अंदर प्रवेश दिलाया गया.
