जमुई सुसाइड केस में सनसनीखेज मोड़: महिला सिपाही के प्यार में UP के युवक ने लगाई फांसी, जानिए क्या है पूरा मामला

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जमुई के टाउन थाना क्षेत्र अंतर्गत खैरमा में उत्तर प्रदेश के युवक सतीश कुमार गुप्ता की फंदे से लटककर आत्महत्या के मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है. घटनास्थल से मिले एक कथित सुसाइड नोट और परिजनों के बयानों के बाद अब इस पूरे मामले में बिहार पुलिस की एक महिला सिपाही की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. मृतक सतीश कुमार गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के विजयपुर गांव का निवासी था और गोपालगंज में एक निजी कंपनी में सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत था. 

बिहार पुलिस में चयन होने के बाद बदला रवैया
परिजनों के अनुसार, करीब ढाई साल पहले उसकी मुलाकात गोपालगंज की ही एक युवती से हुई थी, जो बाद में बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर चयनित हुई. आरोप है कि दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था, दोनों शादी करने वाले थे और युवती सतीश के नाम का सिंदूर भी लगाती थी. वह सतीश के परिवार वालों से भी नियमित बात करती थी, जिससे परिजनों को भी इस रिश्ते पर पूरा भरोसा था. कथित सुसाइड नोट के अनुसार, दोनों 15 अगस्त 2023 से रिश्ते में थे. सतीश ने लिखा कि बिहार पुलिस में चयन होने के बाद युवती का रवैया अचानक बदल गया और उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया. काफी समझाने के बावजूद वह साथ रहने को तैयार नहीं हुई. सुसाइड नोट में आरोप लगाया गया है कि युवती ने सतीश और उसकी मां के साथ गाली-गलौज की, जिससे आहत और मानसिक तनाव में आकर उसने यह आत्मघाती कदम उठाया. सतीश ने अपनी मौत के लिए सीधे तौर पर महिला सिपाही को जिम्मेदार ठहराया है.

महिला सिपाही ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
इस मामले में मृतक के पिता के आवेदन के आधार पर टाउन थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, जिसमें महिला सिपाही को नामजद आरोपी बनाया गया है. वहीं, दूसरी ओर आरोपी महिला सिपाही ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताया है. उनका कहना है कि सतीश और उसके परिवार से उनकी बातचीत जरूर होती थी, लेकिन घटना के दिन उनकी कोई बात नहीं हुई थी और उन्हें इस हादसे की जानकारी सतीश के परिजनों के जमुई पहुंचने पर ही मिली.

थाना अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है. फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य और सैंपल एकत्र किए हैं. बरामद सुसाइड नोट की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है, साथ ही मृतक के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल्स (CDR) को खंगाला जा रहा है ताकि आत्महत्या की असली वजह और परिस्थितियों का सटीक खुलासा हो सके.

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