ड्रंक एंड ड्राइव में 10 हजार का चालान कटते ही भड़का युवक, DC-SSP कार्यालय के बाहर बैठकर पीने लगा शराब, वीडियो वायरल

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जमशेदपुर : ड्रंक एंड ड्राइव में 10 हजार रुपये का चालान क्या कटा, एक शख्स का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। पुलिस की कार्रवाई से नाराज युवक ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया कि अब उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। युवक सीधे डीसी और एसएसपी कार्यालय पहुंचा, अपनी कार सड़क किनारे खड़ी की, शराब की बोतल निकाली, डिस्पोजल ग्लास में पैग बनाया और वहीं बैठकर शराब पीने लगा।

जानकारी के अनुसार, युवक सोनारी झबरी बस्ती का रहने वाला है। उसका दावा है कि बुधवार रात वह अपनी कार से घर लौट रहा था, तभी सोनारी साईं मंदिर के पास ट्रैफिक पुलिस ने उसे जांच के लिए रोक लिया। ब्रेथ एनालाइजर से जांच में शराब पीकर वाहन चलाने की पुष्टि होने पर मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 185 के तहत उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। युवक का कहना है कि उसने मौके पर ही यूपीआई के जरिए चालान की राशि जमा कर दी।

युवक का आरोप है कि चालान कटने के बाद उसने पुलिसकर्मियों से पूछा कि अब वह क्या कर सकता है। उसके मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने कहा कि अब वह 24 घंटे तक “फ्री” है। युवक ने इस कथित जवाब को चुनौती के रूप में लिया और सीधे शराब की दुकान पहुंच गया। वहां से शराब खरीदने के बाद वह डीसी-एसएसपी कार्यालय के बाहर पहुंचा और कार में बैठकर शराब पीने लगा।

वीडियो में युवक यह कहते हुए नजर आ रहा है कि यदि उसका यह कदम गलत है तो उसके खिलाफ एक और मामला दर्ज किया जाए और जेल भेज दिया जाए। वहीं अगर वह गलत नहीं है तो कानून को लेकर लोगों के बीच स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। युवक का सवाल है कि यदि शराब पीकर वाहन चलाना इतना गंभीर अपराध है कि 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है, तो फिर उसे मौके पर छोड़ क्यों दिया गया।

घटना के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। युवक का दावा है कि उसे 24 घंटे तक आजादी होने की बात कही गई थी, हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कानून जानकारों का कहना है कि ड्रिंक एंड ड्राइव का चालान कटने का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर बैठकर शराब पीने की छूट मिल जाती है। ऐसे मामलों में अलग-अलग कानून और नियम लागू होते हैं।

दिलचस्प बात यह रही कि युवक जिला मुख्यालय के बाहर काफी देर तक बैठकर शराब पीता रहा, लेकिन किसी ने उससे यह पूछने की जरूरत नहीं समझी कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। युवक का कहना है कि जब जिला प्रशासन के सबसे महत्वपूर्ण कार्यालयों के सामने ऐसी स्थिति बन सकती है, तो फिर शहर में चलाए जाने वाले अभियान और सख्ती पर भी सवाल उठते हैं।

फिलहाल 10 हजार रुपये के चालान से शुरू हुआ यह मामला अब कानून की समझ, उसकी व्याख्या और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर बहस का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बीच लोग युवक के विरोध के तरीके से ज्यादा इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि आखिर उसे ऐसा करने का आत्मविश्वास मिला कहां से।

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