बेगूसराय का सदर अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार मामला स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का नहीं, बल्कि नवजात शिशु को बदलने के गंभीर आरोप का है. जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली एक महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि उनके जीवित बच्चे को बदलकर मृत नवजात सौंप दिया गया. इस आरोप के बाद सदर अस्पताल परिसर में घंटों हंगामा होता रहा. हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है.
जानकारी के अनुसार, लोहियानगर थाना क्षेत्र के आनंदपुर मोहल्ला निवासी आनंद कुमार की पत्नी सुनीता देवी को प्रसव पीड़ा होने पर मंगलवार (28 जुलाई) को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, जिसमें एक लड़का और एक लड़की शामिल है. परिजनों का आरोप है कि जन्म के समय दोनों बच्चे जीवित और स्वस्थ थे. उनका कहना है कि बच्चे की मां ने दोनों नवजातों को दो बार दूध भी पिलाया था. इसके बाद दोनों बच्चों को एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कर दिया गया और मां को बाहर भेज दिया गया. परिजनों का आरोप है कि कुछ देर बाद अस्पताल की ओर से उन्हें एक मृत नवजात सौंपकर कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए. मृत बच्चे को देखने के बाद परिजनों को शक हुआ कि उनका जीवित बच्चा बदल दिया गया है.
इसी आरोप को लेकर अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा शुरू हो गया. कई घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा. स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा, जिसके बाद मामला शांत कराया गया. दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन ने परिजनों के सभी आरोपों को निराधार बताया है. बेगूसराय सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था. जन्म के बाद एक नवजात की हालत गंभीर हो गई थी, जिसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया. उन्होंने बताया कि एक बच्चे की मौत 2 दिन पहले हो चुकी थी, जबकि दूसरा नवजात अब भी गंभीर अवस्था में एसएनसीयू में वेंटिलेटर पर भर्ती है.
सिविल सर्जन का कहना है कि मां यह समझ नहीं पाई कि कौन-सा बच्चा जीवित है और किसकी मौत हुई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवित बच्चे को बदलकर मृत बच्चा सौंपने का आरोप पूरी तरह गलत और बेबुनियाद है. हालांकि, इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है. यदि अस्पताल प्रशासन के अनुसार नवजात की मौत 2 दिन पहले ही हो चुकी थी, तो इसकी सूचना तत्काल परिजनों को क्यों नहीं दी गई. इस सवाल को लेकर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं. फिलहाल, मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी.
