बेगूसरायः बारिश में भीगती रही लाश, पोस्टमार्टम के लिए भटकते रहे परिजन, 15 घंटे बाद मिली पर्ची

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बेगूसराय का सदर अस्पताल अपनी कारगुजारियों की वजह से सुर्खियों में बना रहता है. यहां कभी डॉक्टर नहीं मिलते तो कभी मरीजों को दवाएं और जांचों के लिए बाहर भेज दिया जाता है. अब सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम हाउस की व्यवस्था भी चरमरा गई है. हद तो तब हो गई जब एक शव को छत तक नसीब नहीं हुई और वह घंटों बारिश में पड़ा भीगता रहा. इस दौरान बेगूसराय पुलिस की संवेदनहीनता भी सामने आई. कोई भी स्वास्थ्य कर्मी या पुलिसकर्मी उस शव को देखने तक नहीं पहुंचा. पीड़ित परिजन बेचारे अपने मृतक का पोस्टमार्टम कराने के लिए दर-दर भटकते रहे. सदर अस्पताल की ओर से कहा जाता रहा कि पहले नगर थाना से लिखवा कर लाना होगा, तब शव का पोस्टमार्टम होगा. पुलिस ने भी उनको खूब दौड़ाया.

पीड़ित परिजनों के मुताबिक, जब वे नगर थाना पहुंचे तो उन्हें बलिया थाना भेज दिया गया. आखिरकार 15 घंटे बाद नगर थाने से पोस्टमार्टम के लिए पर्ची काटी गई और तब जाकर शव का पोस्टमार्टम हो सका. जानकारी के मुताबिक, बलिया थाना क्षेत्र के बड़ी बलिया वार्ड नंबर-10 निवासी सुशीला देवी बीती 13 जुलाई को सड़क हादसे का शिकार हो गईं थीं. पुलिस की ओर से उन्हें इलाज के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल में भर्ती कराया था. इलाज के दौरान महिला की हालत में सुधार हुआ तो डॉक्टरों ने उन्हें घर भेज दिया था. जहां अचानक से उनकी तबीयत फिर बिगड़ी और उनकी मौत हो गई. मौत की सूचना के बाद परिजनों ने बलिया थाना पुलिस को इसकी सूचना दी. 

परिजनों के अनुसार, बलिया थाना की पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कही. जिसके बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए शव लेकर सदर अस्पताल पहुंचे. सदर अस्पताल के कर्मियों ने शव को लेने से इंकार कर दिया और इसके लिए पुलिस रिपोर्ट की मांग की. परिजनों के मुताबिक, शव को भारी बारिश मे छोड़ कर परिजन बलिया थाना गए तो उन्हें वहां से नगर थाने में भेज दिया गया. इसी तरह से नगर थाने ने वापस से बलिया थाना भेज दिया. इस तरह से पीड़ित परिजन सुबह से शाम तक भटकते रहे. बाद में परिजनों ने डीएम और वरीय पुलिस अधिकारियों से इसकी शिकायत की. जिसके बाद उन्हें पोस्टमार्टम स्लिप दी गई और तब जाकर शव को पोस्टमार्टम रूम में रखा जा सका. 

वहीं, जब सदर अस्पताल के डीएस अखिलेश कुमार से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों की इसमें कोई गलती नहीं है. नियमानुसार पुलिस के द्वारा जब पोस्टमार्टम के लिए लाया जाता है, तब जाकर किसी शव का पोस्टमार्टम होता है. उन्होंने कहा कि यहां पर पुलिस की ओर से लापरवाही बरती गई है. उन्होंने कहा कि इस केस में पुलिस ने तकरीबन 15 घंटे बाद एक्सीडेंटल डेथ सर्टिफिकेट दिया. जैसे ही अस्पताल प्रबंधन को वह प्राप्त हुआ, अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत शव का पोस्टमार्टम किया. कुल मिलाकर सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा जिंदा को नहीं बल्कि एक मुर्दा को भी उठाना पड़ा. अब इसकी हर जगह चर्चा हो रही है.

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