सेना के जवान शत्रुघन यादव को जिंदा जलाकर मार दिए जाने की घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया. इलाज के दौरान जवान की मौत की खबर मिलते ही ग्रामीणों ने रामगढ़ मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया और जमकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ गहरी नाराजगी जताई. ग्रामीणों के अनुसार, थाना प्रभारी की ओर से इस केस में न्याय दिलाने को लेकर कुछ सहयोग नहीं किया गया. एसपी के यहां हम लोगों ने मुलाकात किया तो उनके कहने के बाद थाना प्रभारी ने एक्शन लिया लेकिन वह ढीला ढाला रहा इनके ऊपर भी कार्रवाई होनी चाहिए.
प्रदर्शनकारी अनिल कुमार गोंड और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि अपराधियों ने दिनदहाड़े फौजी पर पेट्रोल छिड़क कर उन्हें बेरहमी से जला दिया. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस मामले में लगभग 20 की संख्या में लोग शामिल थे. उन्होंने मांग कीया कि मामले में नामजद व अन्य सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देते हुए फांसी की सजा दी जाए. इसके साथ ही पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले. ग्रामीणों ने प्रशासन से सिर्फ मौखिक आश्वासन के बजाय उच्च अधिकारियों (DM और SP) से लिखित न्याय की मांग की.
मामले की गंभीरता को देखते हुए मोहनिया एसडीएम रत्ना प्रियदर्शनी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे. स्थिति को संभालते हुए एसडीएम रत्ना प्रियदर्शनी ने कहा कि पीड़ित परिवार की मांगों पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि घटना के कुल 4 नामजद आरोपियों में से 3 आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. थाना प्रभारी की भूमिका पर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी. पुलिस लगातार ग्रामीणों से वार्ता कर सड़क जाम समाप्त कराने के प्रयास में जुटी है.
