झारखंड में कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर लगेगा लगाम, राज्यपाल ने 'कोचिंग सेंटर विधेयक 2025' को दी मंजूरी

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झारखंड के शैक्षणिक जगत में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. लंबे समय से निजी कोचिंग संस्थानों की फीस और कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 'झारखंड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक 2025' को अपनी औपचारिक स्वीकृति दे दी है. इस नए कानून के लागू होने के बाद अब राज्य में संचालित हर कोचिंग सेंटर को सरकार के कड़े नियमों के दायरे में आना होगा. इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा करना, कोचिंग के नाम पर होने वाले आर्थिक शोषण को रोकना और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना है. अब हर संस्थान को एक सरकारी वेब पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा.

झारखंड सरकार ने इस कानून को बेहद सख्त बनाया है. यदि कोई कोचिंग संस्थान नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर भारी आर्थिक दंड का प्रावधान है. पहली बार गलती करने पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है, जबकि दूसरी बार या बार-बार नियम तोड़ने पर यह राशि 10 लाख रुपये तक बढ़ सकती है. गंभीर मामलों में संस्थान का पंजीकरण रद्द कर उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है. दिल्ली और कोटा जैसे शहरों में कोचिंग सेंटरों में हुई आगजनी और सुरक्षा की कमी की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा मानकों पर विशेष जोर दिया गया है.

विधेयक को मंजूरी मिलते ही राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि जो एकेडमिक उगाही हो रही थी, उसे प्रभावी ढंग से रोका जाएगा. दिल्ली और कोटा के कई सेंटरों में आगजनी की घटनाएं हुई थीं, जहां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था. नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था, इसीलिए यह जरूरी था.

वहीं, मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे भी हर चीज के लिए जवाबदेही चाहते हैं, लेकिन बीजेपी ने झारखंड सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है. प्रवक्ता अजय शाह ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार कॉर्पोरेट कोचिंग सेंटरों को फायदा पहुंचाना चाहती है. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकार चाहती है कि छोटे कोचिंग सेंटर झारखंड से खत्म हो जाएं और सिर्फ बड़े कोचिंग सेंटर ही चलें.

दूसरी ओर, कोचिंग संचालकों में भी इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है. कुछ संचालकों का मानना है कि भारी रजिस्ट्रेशन शुल्क और कड़े नियम छोटे कोचिंग सेंटरों के लिए आर्थिक बोझ बन जाएंगे, जिससे अंततः शिक्षा और महंगी हो सकती है.

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