सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सीजीएल परीक्षा मामले में हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, याचिका खारिज

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 रांची से आई एक बड़ी खबर में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की सीजीएल परीक्षा से जुड़े विवादित मामले पर अपना फैसला सुना दिया है. अदालत ने राज्य सरकार और उन अभ्यर्थियों के पक्ष में निर्णय लिया जो परीक्षा में सफल हुए थे. शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के पहले दिए गए आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया. इस फैसले से उन हजारों युवाओं को राहत मिली है जो लंबे समय से अपनी नौकरी का इंतजार कर रहे थे. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की और साफ-साफ कहा कि हाईकोर्ट का फैसला बिल्कुल सही और निष्पक्ष है, इसमें किसी तरह की दखलअंदाजी की जरूरत नहीं है. इससे अब परीक्षा के परिणाम पर लटकी तलवार हट गई है और चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है.

यह पूरा मामला झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें पेपर लीक के गंभीर आरोप लगे थे. कई अभ्यर्थियों ने इस पर सवाल उठाए और जनहित याचिका दायर की. इससे पहले, 3 दिसंबर को झारखंड हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई की थी और एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था. हाईकोर्ट ने 10 ऐसे संदिग्ध उम्मीदवारों के परिणाम पर रोक लगा दी थी, जिन पर पेपर लीक में शामिल होने का शक था. लेकिन बाकी सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति को हरी झंडी दे दी गई. अदालत ने कमीशन को निर्देश दिया कि वे आगे की प्रक्रिया पूरी करें और मेरिट लिस्ट जारी करें. इस आदेश के बाद कमीशन ने लिस्ट निकाली और राज्य सरकार ने पिछले हफ्ते चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र भी दे दिए.

हाईकोर्ट ने पेपर लीक के आरोपों पर गौर किया और कहा कि जिन अभ्यर्थियों पर संदेह है या जो आरोपी बनाए गए हैं, उनके रिजल्ट को रोका जाए. लेकिन पूरे मामले की जांच के लिए सीबीआई को सौंपने की मांग को ठुकरा दिया. अदालत का मानना था कि यह मामला इतना बड़ा नहीं है कि सीबीआई इसमें शामिल हो. इसके बजाय, पहले से गठित विशेष जांच टीम को ही जांच जारी रखने का आदेश दिया गया. टीम को छह महीने के अंदर जांच पूरी करने को कहा गया है. इस दौरान सुनवाई में सफल अभ्यर्थियों की तरफ से वकील अमृतांश वत्स ने मजबूत दलीलें पेश कीं, जिससे निर्दोष उम्मीदवारों के हितों की रक्षा हुई.

इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा उन सफल अभ्यर्थियों को हुआ है जो लंबे समय से अपनी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे थे. अब उनकी नियुक्ति पर कोई रोक नहीं है और वे जल्द ही काम शुरू कर सकेंगे.

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