2020 में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के समय हुए दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 5 अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह साफ हो गया है कि उमर खालिद और शरजील इमाम अभी जेल में ही रहेंगे. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यूएपीए की धारा 43डी5 के तहत जमानत के प्रावधान बेहद सख्त हैं. इन आरोपियों ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था. उमर खालिद ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद जेएनयू से एमए और एमफिल किया था. एमफिल में उनका शोध झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र के आदिवासियों पर आधारित था. उन्होंने आगे चलकर पीएचडी भी की, जिसका विषय झारखंड के आदिवासियों पर राज्य शासन और सत्ता संरचना था.
दरअसल, उमर खालिद ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के किरोड़ीमल कॉलेज से इतिहास में स्नातक किया था. उसके बाद जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से इतिहास में एमए और एमफिल किया था.
आरोपियों के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में मुकदमे में हो रही अत्यधिक देरी को आधार बनाया था. वकीलों ने कोर्ट को बताया कि आरोपी पिछले 5 साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं, लेकिन अभी तक मुकदमे का ट्रायल शुरू होने की दूर दूर तक संभावनाएं नजर नहीं आ रहीं.
वकीलों का यह भी कहना था कि अभी तक अभियोजन पक्ष इस बात को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं दे पाया है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों ने हिंसा भड़काई थी. इन वकीलों ने बिना ट्रायल के हिरासत में रखने को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया था.
