जमीन के बदले नौकरी घोटाले मामले में दिल्ली राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आज (9 जनवरी) अपना फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेज प्रताप यादव , तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. कोर्ट ने इस पूरे मामले में कुल 98 आरोपियों में से 52 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया है. वही, बाकी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दे दिए हैं. इस मामले में 5 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, तो अब 41 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलेगा. इस मामले में सुनवाई 29 जनवरी को होगी. ऐसे में बहुत से लोग होंगे जो ये नहीं जानते होंगे कि आखिर ये पूरा मामला क्या है. आइए विस्तार से जानते हैं.
नौकरी देने के बदले जमीन
बता दें कि जमीन के बदले नौकरी घोटाला (Land for Job Scam) वह मामला है जिसमें रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीन लेने के आरोप लगाए गए हैं. साल 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस गठबंधन को जीत मिली और लालू यादव की पार्टी ने 24 सीटों जीती थी. जिसके बाद मनमोहन सरकार में लालू यादव रेल मंत्री बन गए. ये मामला तब का है जब 2004 से 2009 तक वे रेल मंत्री रहे. इसी दौरान मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित इंडियन रेलवे के वेस्ट सेंट्रल जोन में ग्रुप डी कैटेगरी में भर्तियां हुईं.
नियमों को ताख पर रखकर भर्ती
लालू यादव पर आरोप है कि ये भर्तियां नियमों को ताख पर रखकर की गई थीं. जमीनों को बहुत कम दाम या फिर गिफ्ट दिखाकर लिया गया. जिन लोगों ने ये जमीन दी, उनकी रिश्तेदारों को जल्द ही रेलवे में नौकरी भी मिली. 2020 में सीबीआई और ईडी ने बिहार और दिल्ली के कई ठिकानों पर छापेमारी की, जिसके बाद इस मामले में जांच और तेज हो गई.
कई सालों तक चला ये स्कैम
जांच में खुलासा हुआ कि पटना और आसपास की कई जमीनें लालू परिवार (Lalu family) या फिर उनके नियंत्रण वाली कंपनियों के नाम पर ट्रांसफर है. 18 मई 2022 को CBI ने इस मामले में केस दर्ज किया. जांच एजेंसियों की माने तो यह स्कैम कई सालों तक चला और इसमें जमीन के बदले नौकरी दी गई. इस मामले में सीबीआई ने पहली चार्जशीट 7 अक्तूबर को दाखिल की थी. फिर 7 जून 2024 में इस केस की आखिरी चार्जशीट पेश की गई थी.
