UGC रेगुलेशन पर 'छात्र संग्राम': पटना में जलाई गईं कॉपियां, रांची की सड़कों पर उतरे छात्र; सवर्ण समाज ने कानून को बताया 'अभिशाप'

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राजधानी रांची में बुधवार देर शाम यूजीसी की नई गाइडलाइंस के विरोध में सामान्य वर्ग के छात्रों ने बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान छात्रों ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की और नया रेगुलेशन वापस लेने की मांग की. प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि यूजीसी का नया रेगुलेशन विशेष रूप से सामान्य वर्ग के छात्रों को टारगेट करके बनाया गया है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है. छात्रों ने आरोप लगाया कि इस कानून से समाज में समानता स्थापित होने के बजाय असमानता और अधिक बढ़ेगी. छात्रों का यह भी कहना है कि इस कानून का दुरुपयोग कर कोई भी व्यक्ति गलत तरीके से यूजीसी से जुड़े मामलों में उन्हें फंसा सकता है, जिससे निर्दोष छात्रों को कानूनी परेशानियों और जेल तक का सामना करना पड़ सकता है. प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि यह कानून छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए. छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

पटना में बिहार स्टूडेंट यूनियन यूजीसी के खिलाफ किया प्रदर्शन

यूजीसी रेगुलेशन, 2026 के विरोध में पूरे देश में लगातार विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. बिहार की राजधानी पटना के दिनकर चौराहे पर बुधवार को बिहार स्टूडेंट यूनियन की तरफ से विरोध प्रदर्शन किया गया. इस दौरान आक्रोशित छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरों पर न केवल कालिख पोती, बल्कि यूजीसी बिल की कॉपी को जला भी दिया. आक्रोशित छात्रों का कहना है कि सरकार समानता का बात करती है मगर जो रेगुलेशन लाया गया है, उसमें समानता की बात कही नहीं है. हम बच्चे पढ़ने के लिए कॉलेज और यूनिवर्सिटी जाते हैं. ये रेगुलेशन आपसी विभेद को दर्शाता है. 

लखीसराय में सवर्ण सेना ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका

लखीसराय के विद्यापीठ चौक के पास सवर्ण समाज के लोगों ने यूजीसी के नए संशोधित कानून, 2026 के विरोध में प्रदर्शन किया. इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन भी किया गया. प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग की. उन्होंने शपथ ली कि यदि कानून वापस नहीं लिया जाता है, तो आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि वे नरेंद्र मोदी सरकार के पार्टी प्रतिनिधियों का उनके विधानसभा क्षेत्रों में घेराव करेंगे और जरूरत पड़ी तो धरना प्रदर्शन और उग्र प्रदर्शन भी होगा. प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को सवर्ण बच्चों के लिए 'अभिशाप जैसा' बताया.

मुंगेर में पीएम का फूंका पुतला, चरणबद्ध आंदोलन की दी धमकी

यूजीसी के नए नियमों को लेकर देश भर में सवर्ण समाज की ओर से विरोध जताया जा रहा है. बुधवार को मुंगेर के अग्रहण गांव में समाजसेवी चंदन सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया. सवर्ण समाज के युवाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए यूजीसी के नए नियम का विरोध किया और पीएम का पुतला फूंका. इस मौके पर समाजसेवी चंदन सिंह चौहान ने कहा कि यूजीसी का यह नया नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य के लिए घातक साबित होगा. यूजीसी के रेगुलेशन के लागू होने के बाद उच्च शिक्षा में असमानता बढ़ेगी और योग्य छात्रों के साथ अन्याय होगा. उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे फैसले ले रही है, जिनसे प्रतिभा के बजाय वर्ग विशेष को लाभ पहुंचाया जा रहा है. उन्होंने मांग करते हुए कहा कि यूजीसी के नए नियमों को तत्काल वापस लिया जाए और शिक्षा नीति में सभी वर्गों के छात्रों के हितों का समान रूप से ध्यान रखा जाए. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा. इस मौके पर नीतीश सिंह, सौरभ सिंह, पंकज सिंह, मंगल सिंह, जयप्रकाश सिंह, शालिग्राम सिंह, उदय सिंह, चंदन सिंह, सन्नी सिंह आदि मौजूद थे.

यूजीसी के नए नियम का आइसा ने किया स्वागत

यूजीसी के समता संवर्धन विनियम का छात्र संगठन आइसा ने स्वागत किया है. आइसा के मुताबिक, यह बदलाव किसी संस्थान और सरकार के द्वारा नहीं किया गया है, बल्कि छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के संघर्ष का परिणाम है. शिक्षण संस्थानों में जातिवाद और लिंग के आधार पर भेदभाव बढ़ रहा है. 2024-2025 में 118% जाति उत्पीड़न बढ़ा है. जिसपर लगाम इस कानून से लगेगा. संगठन ने यूजीसी की कमेटी में छात्रों और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है.

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