झारखंड के चाईबासा, हजारीबाग और कई अन्य जिलों में जंगली हाथियों के तांडव से अब ग्रामीणों को मुक्ति मिलने वाली है. वन विभाग ने इन 'बेलगाम' हाथियों को काबू करने के लिए एक ऐसी रणनीति बनाई है, जो पहले कभी नहीं देखी गई. अब जंगली हाथियों से मुकाबला करने के लिए 'हाथियों का बॉस' यानी 'कुमकी' (Kumki) हाथियों की स्पेशल टीम कर्नाटक से बुलाई जा रही है.
1. कौन हैं ये 'कुमकी' हाथी और क्यों हैं ये खास?कुमकी हाथी दरअसल खास तौर पर प्रशिक्षित एशियाई हाथी होते हैं. 'कुमकी' शब्द फारसी से आया है, जिसका अर्थ है 'मददगार'. ये हाथी इतने निडर और अनुशासित होते हैं कि घने जंगलों के बीच हिंसक हाथियों के सामने भी शांत रहते हैं.
रणनीति: कुमकी हाथियों की पीठ पर सवार होकर वन विभाग की टीम जंगली हाथियों के करीब पहुंचती है और उन्हें बेहोशी का इंजेक्शन (डार्ट) मारकर काबू करती है.
2. कर्नाटक से आएगी 'स्पेशल 6' की टीमझारखंड के प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (PCCF) रवि रंजन ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में जानलेवा हमलों को रोकने के लिए 6 कुमकी हाथियों को तैनात किया जाएगा. ये हाथी न केवल जंगली हाथियों को पकड़ेंगे, बल्कि उन्हें रिहायशी इलाकों से वापस जंगल की गहराई में खदेड़ने में भी माहिर हैं.
3. चाईबासा और हजारीबाग में ऑपरेशन की तैयारीहाल के दिनों में चाईबासा और हजारीबाग में हाथियों ने कई इंसानी जानें ली हैं. अब इन प्रशिक्षित हाथियों को अलग-अलग जोन में रखा जाएगा ताकि सूचना मिलते ही 'हाथियों के बॉस' मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित कर सकें.
