झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश कर दिया है. इस बार 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया, जो पिछले बजट से 10% ज्यादा है. बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार पर खूब निशाना साधा. वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार हमारा सहयोग नहीं कर रही है. केंद्र से पैसा नहीं मिल रहा है. वित्त मंत्री ने कहा कि किसी के पैर खींचना आसान होता है, लेकिन उसका हाथ थामकर उसकी मदद करना, बहुत कठिन होता है. मैं समझता हूं कि शायद वह महान नहीं बन सकते. राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि केंद्र से अनुदान राशि के 11000 करोड़ नहीं मिले. उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण पर भी टिप्पणी की. फिर भी हमारी सरकार में अभी तक एक भी कर्मचारी का एक भी महीने का वेतन नहीं रुका है.
केंद्र पर निशाना साधते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि जीएसटी के रेशनलाइजेशन जरिये प्रतिवर्ष 4000 करोड़ का नुकसान हो रहा है. केंद्र सरकार के वित्त मंत्री के समक्ष जीएसटी काउंसिल की बैठक में भी यह बातें रखी थीं. जीरामजी योजना के तहत 5,640 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पढ़ने वाला है. कॉल कंपनियों का बकाया राशि भी हमें उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. झारखंड के सोशल इकोनॉमिकल अपलिफ्टमेंट के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं. भले ही केंद्र सरकार हमें सपोर्ट नहीं करें, लेकिन हम कोई कमी नहीं होने दे रहे हैं.
किस विभाग को कितनी राशि आवंटित हुई?
कृषि विभाग के लिए 4884 करोड़ रुपये
ग्रामीण विकास के लिए 12346 करोड़ रुपये
जल संसाधन के लिए 2714 करोड़ रुपये
पंचायती राज विभाग के लिए 2283 करोड़ रुपये
मैया सम्मान योजना के लिए 14 हजार 65 करोड़ रुपये
महिला बाल कल्याण समाजिक सुरक्षा विभाग का बजट 22 हजार 995 करोड़ रुपये
प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए 16251 करोड़ रुपये
तकनीकी शिक्षा के लिए 2564 करोड़ रुपये
स्वास्थ्य विभाग का बजट 7990 करोड़ रुपये प्रस्तावित
पेयजल स्वक्षता विभाग के लिए 5194 करोड़ रुपये
खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता विभाग के लिए 2887 करोड़ रुपये
श्रम नियोजन प्रशिक्षण एवं कौशल विकास के लिए 1168 करोड़ रुपये
SC-ST, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के लिए 3568 करोड़ रुपये
वन विभाग के लिए 1544 करोड़ रुपये
पथ निर्माण विभाग के लिए 6601 करोड़ रुपये
ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 5081 करोड़ रुपये
नागर विमानन विभाग के लिए 138 करोड़ रुपये
ऊर्जा विभाग के लिए 11 हजार 197 करोड़ रुपये
उद्योग विभाग के लिए 541 करोड़ 30 लाख रुपये
भवन निर्माण विभाग के लिए 894 करोड़ रुपये
नगर विकास एवं आवास विभाग के लिए 3919 करोड़ रुपये
पर्यटन विभाग के लिए 361 करोड़ 67 लाख रुपये
सूचना एवं प्रौद्योगिकी के लिए 328 करोड़ रुपये
सूचना एवं प्रौद्योगिकी के लिए 328 करोड़ रुपये
ग्रह कारा एवं आपदा प्रबंधन 11 हजार 38 करोड़ रुपये
योजना एवं विकास विभाग के लिए 539 करोड़ रुपये
बाल बजट के लिए 10793 करोड़ रुपये
