जहानाबाद में 5 वर्ष पूर्व घोसी थाना में पुलिस हाजत में के दौरान हुए युवक मौत का मामला एक बार फिर गरमा गया है. विधानसभा में दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठने के बाद परिजनों में न्याय की उम्मीद जगी है. वहीं पुलिस महकमे की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मामला घोसी थाना क्षेत्र के लखावार गांव का है, जहां 18 वर्षीय युवक गिरिजेश कुमार उर्फ जेसिया की वर्ष 2021 में पुलिस हिरासत में संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी. आरोप है कि युवक को हाजत में पीट-पीटकर मार दिया गया. घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों की भीड़ थाने पर उमड़ पड़ी थी और मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा.
तत्कालीन थानाध्यक्ष निखिल कुमार दोषी
मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर न्यायिक जांच कराई गई. जांच रिपोर्ट में तत्कालीन थानाध्यक्ष निखिल कुमार को घटना के लिए दोषी पाया गया. रिपोर्ट तत्कालीन एसपी दीपक रंजन समेत वरीय अधिकारियों को सौंपी गई थी. जांच में कहा गया कि तत्कालीन थाना प्रभारी ने अपने कर्तव्यों और दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही के कारण ऐसी परिस्थिति पैदा होने दी, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि युवक कि मौत हो गई. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि वे मृतक की समुचित सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे और न्यायालय में भी तथ्यों के संबंध में सही बयान नहीं दिया. जांच में जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और पुलिस महा निदेशक से दोषी अधिकारी के विरुद्ध विभागीय एवं विधिक कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई थी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके.
संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई नहीं
इस पूरे मामले में हैरानी की बात यह रही कि जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गई. उल्टे उन्हें इंस्पेक्टर से प्रमोशन देकर डीएसपी बना दिया गया. इससे पुलिस विभाग की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. अब यह मामला बिहार विधानसभा में उठा है. जहानाबाद से राजद विधायक राहुल कुमार ने सदन में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है. सदन में मामला उठने के बाद परिजनों में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि उन्हें न्याय मिलेगा. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि न्यायिक जांच रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई और किन अधिकारियों ने इसे दबाया? अब सबकी नजरें राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय पर टिकी हैं कि क्या इस बार दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई होगी या मामला फिर फाइलों में दबकर रह जाएगा.
