मोतिहारी में क्रेडिट लोन नाम के निजी संस्थान के क्लस्टर मैनेजर और टेरिटरी मैनेजर के लिए बीती रात कयामत की रात बन गई थी. हालात, ऐसे हुए थे कि मोतिहारी पुलिस ने एनएच के चकिया टॉल प्लाजा को भी कुछ देर के लिए बंद करवा दिया था. सघन वाहन जांच के लिए सड़कों पर मुस्तैद नगर थाना की पुलिस ने कार चालक को रुकने का इशारा किया पर कार रुकने के बजाय तेज रफ्तार से भागने लगी जैसे कार में कोई अपराधी बैठा हो. कार की रफ्तार देख पुलिस का शक पुख्ता हो गया कि कार में कुछ तो गड़बड़ी है. जो पुलिस को देखकर कार फिल्मी स्टाइल कार भाग रहा है. एक तरफ कार का काला रंग जो अमूमन खास छवि के लोगों की पसंद मानी जाती है ऊपर से पुलिस को देखकर कार की तेज रफ्तार में भागता हुआ देख नगर थाना पुलिस ने छतौनी पुलिस को इसकी सूचना दिया. आनन फानन में वायरलेस कर सभी थाना को एलर्ट किया गया.
नगर थाना, छतौनी थाना समेत अन्य थाना की पुलिस जो उस वक्त सड़कों पर ही मौजूद थी, सभी एक्टिव होकर सड़क पर बैरिकेटिंग लगा कर कार के आने का इंतजार करने लगी थी. इसी दौरान छतौनी में लगे बैरिकेटिंग को तोड़ता हुआ तेज रफ्तार कार भागने लगा. इस दौरान छतौनी थाना की स्कार्पियो ने भाग रहे कार का पीछा किया पर स्कार्पियो और कार में कई जगह टकराहट होने के बावजूद कार कोटवा की तरफ भाग निकली.
छतौनी थाना क्षेत्र में ही कार के पिछले सीट पर बैठा टेरिटरी मैनेजर सन्नी को पीछे से गोली लगी. गोली कार को छेदती हुई सन्नी के लंग्स में जा फंसा है. जिस वक्त गोली लगी उस वक्त सन्नी इतने नशा में था कि उसने गोली को मामूली चोट समझ लिया था और गाड़ी चला रहे सूरज जो कि क्रेडिट लोन का क्लस्टर मैनेजर के पद पर कार्यरत है उसे बोला कि भैया कोई ईंट फेंका है, जिससे मुझे चोट लगा है आप गाड़ी चलाते रहिए नहीं तो पुलिस पकड़ लेगी.
सन्नी को गोली लगने का एहसास तब हुआ जब कार का तेल खत्म हो जाने के बाद वो गाड़ी बदलकर दूसरी गाड़ी में बैठा. गोली से घायल सन्नी को मोतिहारी के कनक के बाद रहमानिया हॉस्पिटल ले जाया गया पर गोली नहीं निकली तो मुजफ्फरपुर के जानकी हॉस्पिटल फिर पटना के मेदान्ता में ले जाया गया, जहां आज भी सन्नी जिंदगी की जंग लड़ रहा है. मंगलवार के देर रात तक पटना में भी गोली नहीं निकाला जा सका है. सन्नी को गोली कैसे और किसकी लगी है यह अभी अबूझ पहेली बनी हुई है.
इधर, छतौनी थाना में कार मालिक समेत अन्य अज्ञात को अपराधी बताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया गया है. मगर, सबसे बड़ा सवाल यह है कि कार सवार अगर अपराधी ही थे तो जब पुलिस मोतिहारी के रहमानिया में घायल सन्नी से पूछताछ करने पहुंची थी, जहां पुलिस ने फोटो भी लिया फिर मुजफ्फरपुर के जानकी हॉस्पिटल में भी जाकर पुलिस ने पूछताछ किया था तो कथित अपराधियों को अपने अभिरक्षा में क्यों नहीं लिया गया? पुलिस के एफआईआर में जिसे अपराधी बताया गया उससे मिलकर पुलिस का लौट जाना क्या यह बताता है कि पुलिस को भी सच्चाई मालूम है?
