मिडिल ईस्ट में गहराते युद्ध के संकट के बीच दुबई और शारजाह में फंसे झारखंड के निवासियों को लेकर बड़ी खबर है. लंबे समय से घर वापसी की उम्मीद लगाए बैठे इन लोगों को बुधवार की रात शारजाह से दिल्ली लाया गया. आज ये सभी नागरिक दिल्ली से विमान की तरफ से रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पहुंचेंगे.
बताया जा रहा है कि झारखंड के कई जिलों के ये लोग एक बिजनेस ट्रिप के सिलसिले में दुबई गए थे. इसी दौरान क्षेत्र में शुरू हुए युद्ध की वजह से वह वहीं फंस गए. खाने-पीने से लेकर सुरक्षा तक की चिंता को लेकर इन लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए लगातार झारखंड और केंद्र सरकार से मदद की अपील की थी.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि देश समेत झारखंड की जनता को हमारी तरफ से बहुत - बहुत शुभकामनाएं, आज हम अपने परंपराओं के साथ गांव में है, खड़ी के देशों में फंसे लोगों के लिए भारत सरकार कुछ भी करेगी इसके लिए हमने भारत सरकार से आग्रह भी किया है. ये बातें सीएम ने अपने पैतृक गांव रामगढ़ के नेमरा में कही.
दरअसल, बाहा पर्व मनाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पैतृक गांव रामगढ़ के नेमरा पहुंचे हैं. इस क्रम में मांदर की गूंज और बाहा गीतों की लय सुनाई दे रही थीं. फागुन के महीने में जब प्रकृति अपने नए पत्तों और फूलों से श्रृंगार करती है तब आदिवासी समाज अपने इष्ट देव जाहेर ईरा और मरांग बुरु की पूजा कर बाहा पर्व मनाता है. नेमरा के जाहेर थान में मुख्यमंत्री के साथ ग्रामीण अपने पाहन की अगुआई में साल पलास और महुआ के फूलों को आज ईश्वर को अर्पित किया हैं.
मान्यता हैं कि इस पूजा के बाद ही समाज मे नए फल फूलो का उपयोग और शादी विवाह जैसे मांगलिक कार्य शुरू होते है. बाहा पर्व को आदिवासी होली भी कहा जाता है लेकिन यहां कृतिम रंगों का कोई स्थान नहीं है इस दौरान ग्रामीण एक दूसरे पर शुद्ध पानी छिड़क कर खुशियां मनाते हैं. पाहन के द्वारा प्रकृति फूलों को घर-घर जाकर बांटा जाता है जिसे महिलाएं अपने जुड़े एवं पुरुष अपने कानों पर सजाते हैं. आदिवासी समाज में युवाओं के लिए यह अपने संस्कृति से जुड़ने का एक बड़ा माध्यम है. पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत का यह मेल समाज को प्रेरित करता है कि अगर प्राकृतिक सुरक्षित रहेगी तभी मानव का अस्तित्व बचेगा.
