पटना हाईकोर्ट ने सात वर्ष से कम सजा वाले केस में अभियुक्त को गिरफ्तार कर सीधे जेल भेजे जाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के डीजीपी को तलब किया है. सुप्रीम कोर्ट ने इससे संबंधित स्पष्ट आदेश दे रखें, जिनका जमुई पुलिस ने पालन नहीं किया, इसको लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए डीजीपी को जमुई के एसपी, एडीपीओ और एसएचओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही जबतक कार्रवाई पूरी नहीं होगी, तबतक एसएचओ को किसी केस की जांच नहीं सौंपने का आदेश दिया है.
कोर्ट ने केस के तत्कालीन जांच अधिकारी/एसएचओ को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किये जाने पर अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2 के तहत दीवानी अवमानना मान कारण बताओ का नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने SHO को 8 सप्ताह के भीतर अपना जबाब दाखिल करने का आदेश दिया है. जस्टिस अरुण कुमार झा ने कुमार दुष्यंत की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद ये आदेश दिया. कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद 7 वर्ष से कम सजा वाले केस में अभियुक्त को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा रहा है.
क्या है पूरा मामला?
कोर्ट को बताया गया कि 20 जुलाई 2020 को जमुई पुलिस थाना में IPC की धारा 420 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(सी)(डी) के तहत एक प्राथमिकी (379/2020) दर्ज कराई गई थी. उसमें कहा गया था कि फेसबुक अकाउंट को हैक करके उससे आपत्तिजनक पोस्ट किए गए हैं. इसके जांच का जिम्मा पुलिस उप-निरीक्षक को सौंपा गया था. इस मामले में आवेदक जब जांच अधिकारी से मिलने गया, तो उन्होंने उसे धमका कर भगा दिया. आरोप है कि थाने में न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, बल्कि परिवार के सदस्यों को भी झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई.
जांच अधिकारी ने इस मामले को गंभीर बनाने के लिए आईपीसी की धारा 420 गलत तरीके से जोड़ दिया. इसपर आपत्ति किये जाने के बावजूद यांत्रिक रूप से आईपीसी की धारा 420 के तहत मामले को सही ठहराते हुए पर्यवेक्षण नोट दिया गया. याचिकाकर्ता के मुताबिक, 20 नवंबर 2020 को जब वह जिला शिक्षा कार्यालय में आयोजित एक सेमिनार से लौट रहे थे तभी सादे कपड़ों में कुछ पुलिसकर्मियों ने उसे रास्ते में रोका, उसका मोबाइल छीना और जबरन थाने ले गए.
पुलिस स्टेशन में SHO ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया. परिवार के किसी भी सदस्य से मिलने नहीं दिया गया. उनके पिता को भी अपमानित करके और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर वहां से भगा दिया गया. बाद में उसे हथकड़ी लगाकर जमुई के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के कोर्ट में पेश किया गया. न्यायालय ने पाया कि पुलिस अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों को पूरी तरह नजरअंदाज किया है. कोर्ट ने मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 19 जून तय की है.
