नवादा से होटल संचालक के अपहरण मामले में पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल करते पीड़ित को 12 घंटे के अंदर सुरक्षित बरामद कर लिया है. पुलिस ने इस दौरान एक किडनैपर्स को भी धर दबोचा है. आरोपी के पास से एक स्कॉर्पियो कार बरामद हुई है. बताया जा रहा है कि इसी गाड़ी से होटल संचालक को किडनैप किया गया था. जानकारी के अनुसार, पीड़ित अखिलेश कुमार (63 वर्षीय) कोर्ट के पास स्थित टाउन ढाबा रेस्टोरेंट के संचालक हैं और राजेंद्र नगर के निवासी हैं. वह मंगलवार (28 अप्रैल) की रात करीब 10:40 बजे अपने रेस्टोरेंट में बैठे थे. इसी दौरान स्कॉर्पियो पर सवार कुछ युवकों ने उनके होटल पर धावा बोल दिया.
अपराधियों ने गाली-गलौज और मारपीट कर उनसे 80 हजार रुपये रंगदारी और गाड़ी देने की मांग की. मना करने पर उन्हें जबरन स्कॉर्पियो में अगवा कर गोनावां की ओर ले गए. अपराधियों ने पीड़ित को बाद में तीन नंबर बस स्टैंड क्षेत्र में ले जाकर बुरी तरह प्रताड़ित किया. आरोप है कि उन्होंने उनके नाखून तक निकाल दिए. पीड़ित को गंभीर घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बताया जाता है कि अखिलेश कुमार के पुत्र अमित कुमार ने अपहरण की सूचना तुरंत पुलिस को दी, जिसके बाद नगर थाने की टीम सक्रिय हुई और पुलिस कार्रवाई कर अपहरण में शामिल एक युवक को गिरफ्तार किया गया.
नगर थानाध्यक्ष उमाशंकर सिंह के नेतृत्व में एसआई राम इकबाल समेत अन्य अधिकारियों की टीम ने मात्र 12 घंटे के अंदर पीड़ित को राजेंद्र नगर इलाके से घायल हालत में बरामद कर लिया. पुलिस ने इस मामले में एक अपहर्ता कमलेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया और उसकी स्कॉर्पियो भी जब्त कर ली, जिससे अपहरण किया गया था. इस मामले में डीएसपी हुलास कुमार ने बताया कि घटना से पहले छाय रोड और अस्पताल रोड पर दो स्कॉर्पियो सवारों के बीच झगड़ा हुआ था. कोर्ट के पास एक स्कॉर्पियो का शीशा तोड़ दिया गया. इसी बहाने अपराधी होटल में घुसे और अखिलेश कुमार पर आरोप लगाया कि उनके किसी व्यक्ति ने स्कॉर्पियो को नुकसान पहुंचाया है. इसके बाद उन्हें अगवा कर लिया गया.
पुलिस के अनुसार कुल पांच से अधिक अपराधी फरार हैं. थाना प्रभारी ने विश्वास जताया कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा. यह घटना नवादा में रंगदारी और आपराधिक गतिविधियों की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है. पुलिस की तेज कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन बाकी अपराधियों की गिरफ्तारी और पूरी साजिश का खुलासा अभी बाकी है. पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है.
