सीतामढ़ी जिले में प्रशासनिक तंत्र ने मानवता को शर्मसार कर सिस्टम की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है. यहां बाल कल्याण विभाग की लापरवाही के चलते एक नाबालिग लड़की को फिर से देह व्यापार के दलदल में धकेल दिया गया. दरअसल, दिसंबर 2025 में सीतामढ़ी नगर थाना क्षेत्र के रेड लाइट एरिया से कई नाबालिग लड़की को देह व्यापार के दलदल से मुक्त कराया गया था. रेस्क्यू के बाद बच्चियों को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत बाल कल्याण समिति सीतामढ़ी के संरक्षण में भेजा गया, लेकिन अब जो आरोप सामने आ रहे हैं, वे बेहद गंभीर हैं. आरोप है कि मुक्त कराई गई नेपाल की एक नाबालिग लड़की को पर्याप्त सत्यापन और फर्जी दस्तावेज के आधार पर एक ऐसी फर्जी अभिभावक महिला को सुपुर्द कर दिया गया, जो वेश्यालय संचालिका बताई जा रही है.
सूत्रों से प्राप्त दस्तावेज के मुताबिक, पीड़िता नेपाल की रहने वाली है. उसने पुलिस स्टेशन में काउंसलर और बाल कल्याण समिति की टीम के सामने अपना वास्तविक नाम और पता दर्ज कराया था. इतना ही नहीं पीड़िता ने अपने साथ हुई पूरी घटना की जानकारी ऑन पेपर रिकॉर्ड कार्रवाई थी. इसके बावजूद, आरोप है कि बाल कल्याण समिति के संरक्षण से कुछ दिनों बाद ही नाबालिग पीड़िता को फर्जी आधारकार्ड पर वेश्यालय संचालिका को अभिभावक बना कर उसी के हवाले कर दिया गया. दूसरी ओर नेपाल में पीड़िता का पिता करीब दो वर्षों से अपनी लापता बेटी की तलाश में दर-दर भटक रहा था.
इसी दौरान रेड लाइट एरिया में कैद पीड़िता ने किसी तरह अपनी स्थिति की जानकारी अपने पिता तक पहुंचाने में सफलता हासिल की. इसके बाद पीड़िता का पिता सीतामढ़ी पहुंचा और एसपी अमित रंजन को सारी जानकारी दी. इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए अप्रैल 2026 में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और नाबालिग पीड़िता को दोबारा रेड लाइट एरिया से मुक्त कराया गया. एसपी के प्रयासों से आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद पीड़िता को उसके परिजनों को सौंपा गया.
इस सब के बावजूद यह एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि पहली बार मुक्त कराए जाने के बाद बाल कल्याण समिति की ओर से फिस कैसे पीड़िता को उसी दलदल में धकेल दिया गया? आखिर बाल कल्याण विभाग के अधिकारियों ने लड़की को सुपुर्द करते वक्त कागजातों का सत्यापन क्यों नहीं किया? बाल संरक्षण तंत्र की कार्यप्रणाली, सत्यापन प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. फिलहाल, अब इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है.
