नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. इस केस की जांच CBI को सौंपने के बाद देशभर से ताबड़तोड़ दबिश मारी जा रही है और आरोपियों को गिरफ्तार किया जा रहा है. अब केस के तार बिहार से जुड़ गए हैं. दरअसल, दिल्ली पुलिस ने इस मामले में RJD नेता संतोष जायसवाल को दिल्ली से गिरफ्तार किया है. पुलिस उसे इस पूरे कांड का किंगपिंग बता रही है. दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच के अनुसार, पूर्वी चंपारण जिले के घोडासहन स्थित लेन गांव निवासी संतोष जायसवाल ही इस पूरे गिरोह का सरगना है.
जानकारी के मुताबिक, कुछ साल पहले तक उसके पिता एक सिनेमाहॉल में नौकरी करते थे, लेकिन आज आरोपी संजय जायसवाल करोड़ों की संपत्ति का मालिक है. दिल्ली के पॉश इलाके में उसके पास एक कोठी है. अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए उसने खादी का सहारा लिया और लालू यादव की पार्टी ज्वाइन कर ली. राजद पार्टी में उसका कद बड़ी तेजी से बढ़ा और वह पार्टी में राष्ट्रीय सचिव के पद पर पहुंच गया.
जानकारी के मुताबिक, मोतिहारी में स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद संतोष पटना आया था और यहां इसकी मुलाकात तब के समय के सबसे बड़े परीक्षा माफिया से हुई थी. उसके बाद वह भी परीक्षाओं के पेपर लीक कराने लगा. इस धंधे में उतरने के बाद उसने अपने तीन छोटे भाईयों में से दो को डॉक्टर बनाया और एक की बैंक में नौकरी लगवाई. इसके बाद अपने काले धंधे का विस्तार करने के लिए वह पटना छोड़कर दिल्ली शिफ्ट हो गया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में इसका मेडिसीन का बड़ा धंधा है और इसी की आड़ में उसने अपने काले कारोबार का साम्राज्य खड़ा किया. उसके काले कारनामों तक पुलिस के हाथ ना पहुंचे इसके लिए वह राजनीति में उतर गया. सबसे पहले उसने अपने भाई राजन जायसवाल को प्लूरल्स पार्टी से 2020 का विधानसभा चुनाव लड़वाया, लेकिन वह अपनी जमानत तक नहीं बचा सका.
इसके बाद संजय जायसवाल ने खुद राजद ज्वाइन कर ली और बहुत जल्द आरजेडी का राष्ट्रीय सचिव तक बन गया. वह रक्सौल सीट से 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ना चाहता था, लेकिन यह सीट कांग्रेस पार्टी के खाते में चली गई, जिस कारण से उसे टिकट नहीं मिल सका. नीट पेपर लीक मामले में संतोष की गिरफ्तारी के बाद गांववालों का कहना है कि उसकी पकड़ केवल राजनीति तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसका नेटवर्क कई प्रभावशाली लोगों तक फैला हुआ है.
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