बेगूसराय के टॉप-10 अपराधी सोनू और मोनू की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की कार्यशैली पर उठे विवाद की जांच अब तेज हो गई है. रविवार (5 जुलाई) को मुंगेर रेंज के DIG और CID की टीम बलिया थाना क्षेत्र के बरियारपुर गांव पहुंची और ग्रामीणों व परिजनों से पूरे मामले की पूछताछ की. पुलिस के उच्च अधिकारियों ने कई घंटे तक गांव में रहकर दोनों अपराधियों के परिजनों और स्थानीय लोगों से पूछताछ की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. इस मामले में पुलिस अधीक्षक मनीष ने कहा कि गिरफ्तारी को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की उच्चस्तरीय जांच डीआईजी मुंगेर के नेतृत्व में कराई गई है. जांच के दौरान अधिकारियों ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों और परिजनों से पूछताछ की.
एसपी मनीषा ने कहा कि सोशल मीडिया पर यह दावा कि पुलिस ने हथियार खुद अपराधियों की कमर में रखा, पूरी तरह सही नहीं है. उन्होंने कहा कि जो पिस्टल बरामद हुई थी, वह सोनू और मोनू की ही थी और गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसे जब्त किया था. हालांकि, बरामदगी के साक्ष्य के रूप में वीडियो और तस्वीर लेने के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों की ओर से हथियार को कमर में रखने की प्रक्रिया अपनाई गई, जो उचित नहीं थी. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की विभागीय जांच कराई जाएगी और यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
एसपी ने यह भी बताया कि सोनू और मोनू दोनों कुख्यात अपराधी हैं और उनके खिलाफ कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं. पुलिस लंबे समय से उनकी तलाश कर रही थी और गुप्त सूचना के आधार पर घेराबंदी कर दोनों को गिरफ्तार किया गया. जांच के दौरान ग्रामीणों और परिजनों ने भी यह स्वीकार किया कि बरामद हथियार दोनों अपराधियों का ही था. इस बीच सोनू और मोनू का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों कथित तौर पर आधुनिक हथियारों से ताबड़तोड़ फायरिंग करते नजर आ रहे हैं.
